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Jya Bhaduri

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Imam hussain

परिचय इस लेख में इस्लाम को जीवित रखने वाले इमाम हुसैन   के बारे में एक आसान भाषा मे पढ़ने को आप को मिलेगा । उनकी और उनके बच्चों की शहादत की शहादत के बारे में इस लेख में कुछ अंश बताया गया है । "अशुरा इस्लामी कैलेंडर में, मुहर्रम बारह महीनों में से पहला है।  मुहर्रम के 10 वें दिन को "अशुरा" कहा जाता है।  यह गहन दु: ख और शोक का दिन है, जहां शिया समुदाय के मुसलमान इमाम हुसैन (एएस) की याद में एक साथ इकट्ठा होते हैं ।  युद्ध में मारे गए उनके शौर्य की कहानी और  इस्लाम को बचाने के लिए ये सब हुआ ।    इमाम हुसैन (एएस) कौन हैं?    आप।सभी को।ज्ञात हो कि  इस्लाम और शिक्षाओं के कानून और सिद्धांत पैगंबर मुहम्मद (एएस) के लिए प्रकट हुए थे ।   वह इस्लाम के संस्थापक थे।   उनकी बेटी फातिमा ज़हरा (एएस)  जिन्होंने इमाम अली (एएस) से शादी की ।  और उन दोनों की चार संतानें थीं।   दो बेटे थे और दो बेटियां थीं।   दूसरा बेटा इमाम हुसैन (एएस)  नाम था।   वह पैगंबर मुहम्मद (एएस) के पोते थे  और एक बहुत ही मूल्यवान शासक थे।   "इमाम" का अर्थ है आध

Pranaw mukharji

परिचय प्रणव मुखर्जी ये उस नेता का नाम है ,जिसने  राजनीतिक की सुरुआत अपने विरासत में मिले माँ के  राजनीतिक से ही सीखा । 1909 में पैदा हुए प्रणव मुखर्जी बचपन से ही होनहार  थे । अपने राजनीतिक कैरियर में उन्होंने कई उपलब्धियां  प्राप्त की । कांग्रेस पार्टी  से लेकर निर्दलीय सांसद बनकर वो  दिल्ली पहुँचे कई सालों तक विदेश मंत्री से लेकर  फाइनेंस मनिस्टर जैसे उच्च पदों पर रहे । अपने राजनीतिक जीवन मे वो राष्ट्रपति के पद पर भी बिराजमान रहे । उन्होंने राजनीतिक में रहकर कई राजनीतिक घटनाओं का पुस्तकों में रचना की । इस लेख में उनकी माँ और उनके द्वारा दी गई कुछ  भाषणों का उल्लेख है । प्रणव के माँ के उल्लेख   कभी-कभी मैं एक छोटा अभिनेता होती थी । कभी-कभी मैं एक दर्शक होती थी ,लेकिन हमेशा मैं संसद में एक भागीदार थी , या तो ट्रेजरी बेंच पर बैठी रहती  थी या विपक्ष में बैठी  रहती  थी ।  वह  राजनीतिक रूप से संवेदनशील और सचेत थी और स्वाभाविक रूप से, क्योंकि उसके पति, मेरे पिता  1920 से राजनीति में थे  -   और उन दिनों में किसी भी अन्य गृहिणी की तरह जिनके पति स

Hijrah (the स्टोरी of islaam

परिचय एक बार जब हज का मौसम खत्म हो जाता है और ढुल-हिज्जा का महीना समाप्त हो जाता है, तो मुसलमान इस्लामिक वर्ष के अंत को चिह्नित करते हैं।  और मुहर्रम के पहले दिन से नया साल शुरू होता है।   इस्लाम मे इसी महीने में उनके मैसेंजर ,पैगम्बर  जिन्होंने मक्का से मदीना गए और मदीना से इस्लाम  का गठन किया । इस तरह मक्का से मदीना के सफर को इस्लाम मे हिज्रह के नाम से जानते हैं । हिजरी कैलेंडर  मुसलमानों ने हिजरी कैलेंडर का उपयोग किया है, और 1400 वर्षों से ऐसा किया है।  यह एक विशेष कैलेंडर है जो पैगंबर मुहम्मद के हिजरे के रूप में शुरू होता है । हिजरी क्या है?   हिज्र इस्लाम के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण में से एक है।   हिज्र पैगंबर मुहम्मद  का प्रवास मक्का से मदीना तक है।   प्रवास से पहले, मक्का में मुसलमानों को इस्लाम धर्म का पालन करने के लिए गंभीर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।   उन्हें उनकी मान्यताओं के लिए मक्का के बाहरी इलाके में बहिष्कार, दुर्व्यवहार और बहिष्कार किया गया था, और अंत में वर्षों तक सबसे भयानक परिस्थितियों में जीवन जीने के लिए मजबूर किया गया

Story of moharam

परिचय   नमस्कार दोस्तों इस लेख ने इस्लाम के प्रमुख त्योहार मोहर्रम के बारे में कुछ जानकारी हासिल करेगें जो  एक कहानी के रूप में होगा । आज दुनियां  के कुछ देशों को छोड़ कर ज्यादातर  इस्लामिक देशों में इस त्योहार को मनाने पर पाबंधी है । कुछ घटनाओं को आपस के सुमुदाओं में ही अनबन  होने के कारण इसे सुन्नी बहुल देशों में ताजिया बनाने ,मातम मनाने ,जुलूस निकालने पर पाबंधी है । मुस्लिम समुदाय दो भागों में बता हुआ है जो मुख्य हैं  एक सुन्नी और दूसरे शिया । इस मोहर्रम के त्योहार को लेकर लंबे समय से दोनों में  अनबन होते आ रहा है ।फिर भी इस मोहर्रम को  दोनों समुदाय अपने अपने तरीके से मनाते हैं । इसी मोहर्रम के संदर्भ में अनेको कहानियां प्रचलित हैं । जिसमें मुख्य कहानी इमाम हुसैन ,और माँ फातिमा  की है जो आप सभी को पढ़ने को मिलेगा । मोहर्रम की कहानी ये कहानी    हज़रत हुसैन (रली अल्लाहु अन्हु) की   है जो पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पोते थे।  वह हज़रत अली इब्न अली तालिब, और हज़रत फातिमा (रली अल्लाहु अन्हा) के बेटे थे।   पैगंबर हजरत हुसैन