सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
Loved boy (rishi Kapoor) दुनिया को अलविदा किया बॉली वुड का एक और सितारा(rishi Kapur) परिचय (introdaction) Bollywoo के नीव कहें जाने वाले कपूर फैमिली  के 4 सितम्बर 1952 को जन्मे ऋषि कपूर का  मुंबई के रिलायंस हॉस्पिटल में आज 30/04/2020 को सुबह 8.30 बजे 67 साल की उम्र में निर्धन हो गया  दो साल से वो बांन कैंसर से पीड़ित थे जिसका इलाज  अमेरिका में चल रहा था कुछ दिन पहले वो मुंबई  अपने घर चले आए थे । परिवारिक जिंदगी (family Life) ऋषि कपूर का पारिवारिक जिंदगी बहुत ही अच्छा और  प्रसिद्ध कपूर फैमिली से जुड़ा था । वहीं कपूर फैमिली  जिसने बॉलीवुड को एक नए मुकाम पर ला कर खड़ा किया उनके दादा prithavi राज कपूर और पिता राज कपूर  जो बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता और निर्देशक थे इनके अलावा इनके दो भाई रणधीर कपूर और राजीव  कपूर इनके परिवार में शामिल थे जिनके साथ इन्होंने  कंपियान स्कूल मुंबई और  मेयो कॉलेज अजमेर से शिक्षा ग्रहण किया । इनके परिवार के साथ इनके मामा प्रेम नाथ और राजेंद्र नाथ चाचा शशी कपूर और शम्मी कपूर भी इनके परिवार का कहे  या फिर बॉलीवुड

Bollywood, Hollywood, actor IRFAAN KHAN

Irfan khan परिचय (introductions) पूरा नाम , साहेबजादे   इरफ़ान अली खान जिसको आसान भाषा में फिल्म जगत में इरफ़ान खान से जाना गया । इरफ़ान खान एक मुस्लिम परिवार  जयपुर में एक मध्यम परिवार पठान जाति में  पैदा हुए । भारत का वो जयपुर  शहर जिसे गुलाबी सिटी के नाम से भी जानते हैं । इनकी जीवन साथी का नाम सुतापा सिकंदर है को  कालेज के दिनों से इनकी साथी रहीं। इनके आज दो बच्चे हैं जिनका नाम बाबिल और अयान है । इनके पिता का नाम जहांगीर खान  जो टायर का कारोबार करते थे  लगभग १९७७ में जन्में इस महान व्यक्ति 53 साल 29/04/2020 में स्वर्गवास हो गया आज Bollywood का ये  सितारा दुनिया को अलविदा कह गए  भगवान इनकी आत्मा को शांति दे । इरफ़ान खान की परिवारिक जिंदगी (Irfan Khan's family life) इरफ़ान खान की family Life बहुत ही साधारण थी  अपने किशोर अवस्था इन्होंने घर पर ही पढ़ाई पूरी  की इनके पिता  कभी कभी मजाक में इनको इरफ़ान पंडित भी कहकर बुलाते थे। क्यों कि ये मुस्लिम परिवार में होकर नहीं  मांस, नहीं खाते थे। इनका पूरा जीवन शहाकरी व्यतीत किया। उनकी दिली तमन्ना थी

पाप और पुण्य (Sins and virtuous deeds)

Sins and virtuous deeds परिचय (introduction) पृथ्वी पर ज ब हम पैदा होते हैं तो हमें कुछ पता नहीं होता है लेकिन जब हम बड़े होने लगते हैं हमें अपने भाषा , धर्म , कर्म का ज्ञान होने लगता है और जिंदगी में जितने वर्ष हम जीते हैं  उन्हें दो भागों में बांट दिया जाता है चाहे ओ कोई धर्म , पंथ  संप्रदाय हो और ओ है पाप और पुण्य (Sins and virtuous deeds) क्यों मनुष्य जीवन को पाप और पुण्य में बाट दी गई  जब सृष्टि कि रचना हुई तब को भी मानव जाति पैदा हुई  जिसे हम इतिहास में आदि मानव के नाम से जानते हैं। जब आदि मानव ने अपने जीवन में ओ सारी ज्ञान को अर्जित किया जिनसे उनका जीवन आगे अग्रसर हो सके । और  उन ज्ञान को ओ पेड़ पौधे, जीव, परजीवियों से हासिल किया  जिसकी ईश्वर ने रचना की। अगर आप आज बड़े आसानी  से कोई भी समान की रचना , या भोजन पका के खाते हैं तो उसको ढूंढने में सैकड़ों साल लगे है फिर उनको एक नाम  देने में भी कई सालो का समय लगा है। फिर ये सब होने के बाद ओ आदि मानव में जैसे जैसे बुद्धि  का विकास हुआ उनको जब ये बात समझ में आने लगा  कि हमें ऐसा करने से ये क

Life and death (जीवन और मृत्यु)

जीवन और मृत्यु (life and death) जीवन और मृत्यु      (   life     and death ) जीवन और मृत्यु का इस सृष्टि को चलाने में  बहुत ही महत्व पूर्ण भूमिका है । हम इस शब्द को बढ़े ही आसानी से बोलते हैं कि हमारी जिंदगी ऐसी वैसी हैं हमारा जीवन खुशहाल है उसका  कष्टदायक है वगैरा वगैरा। क्या कभी इन शब्दों पर गौर किया है क्या कभी इस  मृत्यु और अपने पैदा होने के चक्र को समझा है। आज के इस भाग- दौड़  भरी जिंदगी में हम  अपने आप को समझ ही नहीं पा रहे हैं। यही कारण है कि हम इस जीवन , मृत्यु के  चक्र में अपनी पहचान नहीं बना पाते । जिसने इस चक्र को समझा वो उस मृत्यु को भी जान लिया कि हमारी मृत्यु कब और कहां , कैसे होने वाली है  आप को इतिहास में इस बात के प्रमाण आज भी लिखे हुए हैं। पहले हम जीवन के बारे बात करेंगे । जीवन   ( life ) पृथ्वी पर जब हम किसी के जरिए किसी जाति में हमारे बीज  की उत्पत्ति होती है तो ओ बीज उस नर में ९ महीने ८ महीने उसके पेट में पलता है जिसे हम गर्भावस्था कहते हैं। जब हम ९ महीने बाद हम इस संसार में आते हैं। तो हमारा जन्म होता है फिर

प्रलय (कलयुग)

क्या है प्रलय ? प्रलय वो शब्द है जो खुद एक प्रश्न है जिसका प्रमाण हमारे धर्म ग्रंथो में भिन्न भिन्न तरह से दिए गए हैं कुरान में इसको कयामत का नाम दिया गया है  जिसका वर्णन एक सत्य घटनाओं की पुनरावृत्ति जैसा किया गया है । जो सुनने में ऐसा लगता है कि ऐसे ही दुनियां खत्म होगी सनातन धर्म में इसका वर्णन एक ग्रंथ के द्वारा भगवान  श्रीकृष्ण द्वारा गीता के उपदेश नाम से है । जिसमें पाप ,पुण्य के आधार पर इस सृष्टि  के चरण बध्य तरीके से बताया गया है । कहते हैं परिवर्तन हमारे जीवन का एक हिस्सा है। उसी तरह पृथ्वी का परिवर्तन भी उसका एक हिस्सा  है जो एक समय आने पर उसका परिवर्तित होना  निश्चय है और इस परिवर्तन को चार भागों में विभाजित किया गया है जिसे हम सतयुग , द्वापर, त्रेता, और कलयुग बताया गया है । तीन युग तो चले गए  ४था कलयुग जिसमे हम सब जी रहें हैं। शायद हमारे सनातन संस्कृति में उन चार वेदों में  इसका वर्णन हो और प्रलय का सटीक अर्थ बताया गया हो  हमे उसकी जानकारी नहीं है । क्यों की गीता का उपदेश सबसे पहले भगवान विस्नु ने  मां लक्ष्मी को दिया था । पर

धर्म (७) कलयुग

कलयुग की परिभाषा…… कलयुग की परिभाषा जो हम जानते हैं क्या ए सही  तर्क हमें इतिहास से मिला है कि कलयुग का मतलब पाप,अधर्म, लूट , मार आदि । आप को बता दें कि ये लेख हमारा खुद की तजुर्बे  एक दूसरो के जीवन से प्रभावित और अपने अंतर मन की कल्पना कहे या व्याखा हैं और जो थोड़ी बहुत किताबें  पढ़ी उनका ज्ञान हैं । इसलिए अगर इसमें कोई त्रुटि  हो जाती है तो उसके लिए आप से क्षमा चाहेंगे। हमारी नजर से कलयुग की परिभाषा  अगर इसके शब्दों पर ध्यान दें तो कुछ और परिभाषित  होता है आप को ज्ञान होना चाहिए शब्द ही वो पहले  आविष्कारक हैं जिस को सुनकर उसकी रचना कर  हम अपने कर्मो को जीवन में उतार पाए हैं। कलयुग।   (शब्द) की व्याख्या,,,,, कलयुग शब्द की व्याख्या इस प्रकार है कलयुग =कल,+युग अगर हम आसान भाषा  में समझे तो इसका अर्थ कल का युग  वो कल का युग जिसमे आप को हर वस्तु, भाषा  कला , विद्या, धर्म , आदि का ज्ञान रहेगा जो  आप को भूत के कालो से प्राप्त हुआ है  जो आप को सतयुग , द्वापर , त्रेता, से मिला है  ये ओ काल है जिसमें आपको ईश्वर , देवी देवता, दानव के