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धर्म ( ४ )

आज १४ अप्रैल दिन मंगलवार आप सभी 
को हमारे तरफ से सादर प्रणाम स्वीकार हो
ईश्वर आप सभी को हमेशा खुश सुख शांति न
प्रदान करें
आप सभी से में माफी चाहूंगा कल मै लेख 
नहीं लिख पाया कुछ उलझने थी इस लिए आज 
जरूर पूरा करूंगा 
कर्म क्या है ????
इसका धर्म से क्या ताल्लुक है,?????
इंसान , समस्त संसार में वो जाति जो ईश्वर 
से लेकर दुनियां की हर वस्तु पर प्रभुत्व 
रखना चाहती है और प्रभुत्व को इस्थापित
करने के लिए हर युग में कभी ज्ञान तो कभी विज्ञान एक इतिहास 
बनाने की कोशिश की जिसे हम आज ग्रंथो, उपनिसदो में तथा
लोक कथाओं के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं
जिससे ये मालूम होता है कि भूत काल सतयुग , द्वापर , त्रेता, और कलयुग 
में हमारा क्या किरदार है इस संसार को चलाने में।
अगर सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं तो कुछ अंश हमें 
अपने शिक्षा ग्रहण करने के समय में मिल जाता है 
अगर हम धर्म को जानना चाहते हैं तो हमें कही और जाने की जरूरत नहीं
हम जिस परिवार में जन्म लिए हैं उसी से जान सकतें हैं।
जैसे कि हम एक किसान के घर जन्म लिया  तो मेरे पिता ने मेरा नाम 
रखा और नाम के पीछे अपना जाति वर्ण लगा दिया 
जिसे हमारे पिता को उनके पूर्वजों से मिला जो इस बात को दरसाता
है कि हमारे पूर्वज किसान थे और उनका कर्म किसानी करना 
था और वो उस कर्म को करके अपने उस कर्तव्य का पालन 
करते थे जिसे हम धर्म कहते हैं।
इसलिए आपको ज्ञात होना चाहिए कि हिन्दू कोई धर्म नहीं हैं
ये एक नाम हमें उन पूर्वजों से मिला है को हमारे कर्मों को देख कर 
हमें हिन्दू पुकारने लगे और ये हिन्दू नाम जहां तक हमने सुना है 
अरबों से मिला है । इस लिए हम कहते हैं कि दुनियां में जन्म लेने वाला
हर इंसान हिन्दू है  और इस हिन्दू नाम की परिभाषा हमारे उस नाम में मिलता है जिसे हम सनातन धर्म के नाम से जानते हैं



क्या है , सनातन,
सनातन अर्थात हर उस कर्मो से सना हुआ ये तन जिससे ये संसार 
का संचार होता है जिसे हम मनुष्य जाति अपना धर्म मानते हैं
और इस सनातन धर्म का पालन मनुष्य ही नहीं इस संसार में जितने भी जीव जंतु पेड़ पौधे हैं वो सभी कर ते हैं। जिससे हमें उनसे कुछ हमें फल प्राप्त 
होता है और हम उनको कुछ भेट प्रदान करते हैं।
जब हमें कोई तत्व कुछ देते हैं तो उसे देव तत्व हम कहते हैं और बदले में 
हम उस तत्व को अपने कर्मो के अनुसार कुछ ना कुछ उन्हें अपने अंदर 
समाहित करते जिसको हम पूजा ,अर्चना  ध्यान के नाम से जानते हैं
यही कारण है कि हम उस परमात्मा की बनाई हुई चौरासी लाख ट्टवों की 
हम पूजा अर्चना करते हैं जिसे हम देवता के नाम से जानते हैं
क्यों कि वो देवता हमें कुछ ना कुछ प्रदान हम करते हैं जिस के बदले में हमें 
उनका सम्मान मर्यादा का पालन करना पड़ता है और ये मर्यादा सम्मान 
एकमात्र सनातन धर्म में ही मिलता है 
यही कारण है कि हम उन देवी देवताओं जैसे गज, सिंह, वेल, आम, पीपल, जैसे। लाखों की पूजा करते हैं
इसलिए हमे इस बात का कभी बोध नहीं नहीं होना चाहिए कि और पंथ समुदाय हमें क्या कहता है क्या करता है । बस हमें अपने कर्म के पथ पर अग्रसर होते हुए इन देवी देवताओं का सम्मान आदर स्मरण करना चाहिए 
हम उस परमात्मा के जितने करीब नहीं उससे ज्यादा ये देवी देवता हैं 
क्यों की ये परमात्मा के बताए हुए मार्ग पर ही चलते है उनका अनुपालन करते हैं उनपर हमारा हक नहीं इस संसार का निर्माण करने वाले का है
आज अगर हम ये कह कर उन बातों से कट जाते हैं कि ये कलयुग 
घोर पाप का समय है तो हम वहां गलत सोचते हैं ।। ।।।।।
आज के लिए। बस इतना ही मिलते हैं धर्म के ५ वे भाग में 
धन्यवाद।।।।।।।।

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