Bollywood, Hollywood, actor IRFAAN KHAN

परिचय (introductions)

पूरा नाम , साहेबजादे  इरफ़ान अली खान जिसको आसान भाषा में फिल्म जगत में इरफ़ान खान से जाना गया ।
इरफ़ान खान एक मुस्लिम परिवार  जयपुर में एक मध्यम
परिवार पठान जाति में  पैदा हुए । भारत का वो जयपुर 
शहर जिसे गुलाबी सिटी के नाम से भी जानते हैं ।
इनकी जीवन साथी का नाम सुतापा सिकंदर है को 
कालेज के दिनों से इनकी साथी रहीं।
इनके आज दो बच्चे हैं जिनका नाम बाबिल और अयान है ।
इनके पिता का नाम जहांगीर खान 
जो टायर का कारोबार करते थे 
लगभग १९७७ में जन्में इस महान व्यक्ति 53 साल 29/04/2020 में स्वर्गवास हो गया आज Bollywood का ये 
सितारा दुनिया को अलविदा कह गए 
भगवान इनकी आत्मा को शांति दे ।

इरफ़ान खान की परिवारिक जिंदगी (Irfan Khan's family life)


इरफ़ान खान की family Life बहुत ही साधारण थी 
अपने किशोर अवस्था इन्होंने घर पर ही पढ़ाई पूरी 
की इनके पिता  कभी कभी मजाक में इनको इरफ़ान पंडित भी कहकर बुलाते थे। क्यों कि ये मुस्लिम परिवार में होकर नहीं 
मांस, नहीं खाते थे। इनका पूरा जीवन शहाकरी व्यतीत किया।
उनकी दिली तमन्ना थी कि वो एक सफल क्रिकेट बने 
और उसके लिए उन्होंने कोशिश भी और उन्हें इंटरव्यू
के लिए भी बुलाया गया पर पैसों की कमी के कारण 
वो उस इंटरव्यू में जा ना सके ये बात जब उन्होंने अपने पिता को बताई तो वो बहुत भावुक होकर बोले पहले क्यों नहीं 
बताया हम कर्ज लेकर तुम्हारे सपने को पूरा करते ।
तब इरफ़ान खान ने बोला ओ सपने हमारे थे उसमें आपको 
कष्ट नहीं देना चाहता था अभी आप ने बहुत कुछ किया है 
और मेरा सौभाग्य है कि अल्लाह ने आप के घर हमें जन्म दिया
इरफ़ान खान अपनी मां से बहुत प्यार करते थे।
फिल्मों में आने के बाद इंटरव्यू में हमेशा अपनी मां का जिक्र 
किया करते थे और बोलते थे मां की एक बात आज भी 
मै अपने हर सफलता से जोड़ता हूं क्यों के मा हमेशा 
बचपन में ये ही कहती थी बेटा जिंदगी जब भी जीना खुल के जीना  जिसमे कोई बंधन भेद ,भाव , जाति का अपमान 
नहीं करना। और ना ही उन्हें कभी दिल पर लेना ।
इस तरह किशोरावस्था अपने परिवार के साथ बिताए ।

इरफ़ान खान की कैरियर Irrfan Khan's career 

इरफ़ान खान की (Irrfan Khan's career) जिंदगी 
उनकी बहुगामी सोच के कठिन परिस्थितियों में भी 
सफलता का परचम लहराया ।
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वो घर से झूट बोल कर 
मुंबई आ गए फिर इस माया नगरी में आकर एनएसडी
ड्रामा स्कूल में एडमिशन ले लिए और Bollywood 
Me अपना भाग्य आजमाया और सफल भी हुए। एनएसडी में एडमिशन 
लेने के कुछ दिनों बाद उनके पिता का देहांत हो गया
जिसके कारण घर से पैसे आना बंद हो गए ।
तब उन्होंने अपने उस एक्टिंग से मिलने  वाले फेलोशिप के पैसे 
से अपना एक्टिंग कोर्स पूरा किया ।
एक्टिंग क्लास में उनकी क्लास मेट सुतापा सिकंदर नाम की 
लड़की ने उनका बहुत साथ दिया ।
जो बाद में इरफ़ान खान ने ,1995 में उस क्लास मेट से शादी रचा ली और जिंदगी भर के लिए अपना साथी बना बना लिया।
सूतापा सिकंदर की वजह से 1998 में पहली डेब्यू फिल्म सलाम बांबे से बॉलीवुड अपने कैरियर की शुरूआत की।
अपने एक्टिंग के दमदार अभिनय के बाद 1998 से लेकर 
इस 2020 तक सैकड़ों फिल्मों में काम किया इन्होंने होली वुड में भी कई फिल्मों में काम किया और सोहरत हासिल की  इनकी पहली फिल्म का आस्कर अवार्ड नमिनेशन हो गया था।
बाद में  इन्होंने मिलेनियर डोग milenuar dog से आस्कर अवार्ड में अपना पर चम लहराया ।
इस तरह ओ एक्टिंग की दुनियां में अपने आंखो और बोल 
की वजह से एक अलग ही पहचान बनाई और अपने कैरियर  में अनेक अवॉर्ड , ट्राफी और नाम से नवाजा गया ।


इरफ़ान खान की (Bollywood)and(Hollywood films)

इरफ़ान खान की bollywood में सैकड़ों फिल्में की 
इनकी प्रशीद फिल्म slaam bomby,maqbul ,piko,saat 
Khun maaf, Hindi midiyam,d day,the lunch box,
Black Mel,karwa,karib karib, single,slamdog
Mileniar,meny more….
Holly wood ki slamdog mileniar, Jurassic Park,life of Pai,boksu the Smith,meny more
ये साउथ की फिल्म में भी अपनी छाप छोड़ी
बांग्ला फिल्म में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया 
इस तरह अनेकों प्रसिद्ध प्राप्त किए ।
इनकी आखरी फिल्म 2019 की English medium 
रही।

इरफ़ान के अवॉर्ड और पुरस्कार


इरफ़ान खान ने अपने फिल्मी कैरियर में अनेक अवॉर्ड, ट्राफी
प्राप्त किया 
इन्हें 2004में hasil फिल्म के लिए बेस्ट खलनायक का अवॉर्ड 
मिला।
2011 में इन्हे भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया।
60 वे फिल्म पुरस्कार 2012 में paan Singh tomar के
लिए श्रेष्ठ अभिनय के लिए अवॉर्ड मिला।
2017 में बनी हिन्दी फ़िल्म Hindi midiyam 
में सर्व श्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला।

इरफ़ान खान की जिंदगी में मायूस वाले पल

इरफ़ान खान की जिंदगी में अनेकों मायूशी वाले पल आए 
पहला पल जब इनके पिता का देहांत हुआ।
दूसरा जब इनको 2018 में कैंसर से ये पीड़ित हुए ।
तीसरा जब ये 2020 में अपनी मां के मौत पर करोना के महामारी की वजह से घर ना जा सके ।
अन्तिम वह पल जो ये 29/04/2020 को मुंबई के kokolaben hospital अपनी अंतिम सासें ली और
इस दुनियां से विदा ले लिया ।
















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