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Eid ( Islamic festival)






इस्लाम धर्म में Eid का महत्व (Importance of Eid in Islam) 

इस्लाम धर्म में Eid का उतना ही महत्व है , जितना कि इस धर्म में  जुम्मे की नमाज और कुरआन का महत्व है ।
वैसे तो इस्लाम धर्म में खासकर तीन  त्योहारों जैसे मोहर्रम ,
बकरीद, और ईद का ज्यादा महत्व है , 
सही मायने में देखा जाए तो ईद ही इस्लाम का एक ऐसा त्यौहार है जिसे सभी धर्म के लोग पसन्द करते हैं
जैसे हिन्दू में dipawli, ईसाई में क्रिसमस, सिक्ख ,धर्म में प्रकाश पर्व को सभी धर्म के लोग पसन्द करते हैं।
दुनियां में धर्म को  ऐसे तरीके से निर्माण किया गया है कि 
इस सृष्टि का संतुलन बना रहे और यही कारण है कि 
उन धर्मो के द्वारा मनाए जाने वाले पर्व भिन्न, भिन्न प्रकार से मनाए जाते हैं ।
जिसमे कुछ सभी धर्मो को पसंद आते हैं और कुछ पर्व, अन्य धर्म को पसंद नहीं आते हैं। जैसे कि इस्लाम के बकरीद , मोहर्रम अन्य धर्म के लोगों को ईद। के मुकाबले कम पसंद किए जाते है क्यों कि ईद एक भाईचारे , सौम्य , का त्योहार है ।
इस दिन सभी मुसलमान अपने देश में रह रहे अन्य समुदाय के 
लोगों ,दोस्तों से ईद की। मुबारक बाद देते हैं और खाने 
में सेवईयों से लोगों का स्वागत करते हैं और एक दूसरे के गले मिलते हैं ।
इस्लामिक महीने के हिसाब से चांद को देख कर एक महीने 
रोजा (व्रत) रखते फिर एक महीने बाद पहली चांद को देख कर 
अपना रोजा समाप्त करते हैं और २९सेवे ,३० दिन ईद मनाते हैं

क्यों मनाई जाती है ईद (Why is Eid celebrated)

कहते हैं इस्लाम को इस्थापित्त करने वाले हजरत मोहम्मद साहब ने एक महीने कुरआन की बाते लोगों में फैलाई ।
जब वो कुरआन की तिलावत करते तो पूरे दिन बिना , खाएं पिए , ही। रह जाते थे। ऐसा लोगों के। बीच कुरआन के मायने 
समझाने में उस किताब को खत्म करने में एक महीने का समय 
लग गया । आपको मालूम। हो कि उस समय ज्यादा तर 
दिन महीने की गणना चांद को देख कर की जाती थी ।
जब मुहम्मद साहब द्वारा कुरआन की बयान खत्म हुई तो 
लोगों ने मुहम्मद को और एक दूसरे को सेवईयों, से बनी 
मीठा व्यंजन को खिलाकर एक दूसरे को मुबारबाद दी ।
फिर उस १४०० इस्वी से ये रोजा रखना ईद मनाने का 
सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक चलता आ रहा है ।

ईद की कुछ बातें  जरा हट के ( Just a few things about Eid)

Is लेख में में आप को कुछ बाते जरा हट के जानने को 
मिलेंगी क्यों  कि आज के धर्म गुरुओं के हिसाब से इस 
Islaam के त्योहार ईद के बारे में आप को जानने सुनने को 
कम मिलेंगी ।
दुनियां का हर मजहब इस सृष्टि और सृष्टि कर्ता  के बीच एक 
तरह के संबंध इस्थापित करने की कोशिश करता है ताकि 
ईश्वर (अल्लाह) के द्वारा बनाई हुई उन रचनाओं से अच्छी तरह
मनुष्य उनको जान सके और अपनी जिंदगी में उनको उतार सके।
हिंदी फिल्म एक्टर इमरान खान जो हमारे बीच नहीं हैं जो एक टीवी न्यूज डिबेट में  धर्म के बारे में एक बात कहा था 
कि जो काम आप को जिंदगी में अच्छी लगती है और उसके 
करने से इंसान से लेकर अल्लाह की बनाई हुई हर जन को 
पसंद आता हो तो आप वही काम करें क्यों कि अल्लाह ने 
हम इंसानों को सोचने समझने की शक्ति इस लिए दी है कि 
हम एक दूसरे को जान , समझ सकें। ना कि अपनी पूरी जिंदगी दूसरे के समझाने बताने पर पर गुजार दें।
अगर इस्लाम में ईद  और रोजा , नमाज बताया गया है 
या मनाया जाता जाता है तो उसके पीछे उस कायनात 
से जुड़ी उन रिश्तों कि डोर है जो हमारे जिंदगी और 
ईश्वर के अस्तित्व के बीच है।
ईद में रोजा रखने का कारण इस्लाम के मानने वालों या कहें 
इंसान उन सभी चीज़ों से रूबरू  होता है जिसको ईश्वर ( अल्लाह) ने निर्माण किया वो समय , दुनियां में आने वाले परिस्थितियों से अवगत होता और उसका एहसास करता 
है कि अगर किसी भी मौसम में अपने आप को कैसे रहकर 
ईश्वर से जुड़ सकता है ।
हम सभी को मालूम। हो कि ईद कभी भी एक मौसम में नहीं मनाई जाती है ये इस्लाम में ऐसा त्योहार है जो ईश्वर के  द्वारा 
निर्माण किया हुआ हर  ऋतु (मौसम ) से इंसान को रूबरू कराता है और हर मौसम में अल्लाह के द्वारा पैदा की हुई 
फल , अनाजों , सब्जियों  जिसका हम दैनिक। जीवन में उपयोग करते हैं से रूबरू कराता और उनके प्रति जीने 
का फलसफा जिंदगी में बताता है ।
लोगों को इस त्योहार के से ये बताता है कि में तुम्हारे लिए 
हर मौसम में मै ओ वस्तुएं अता (प्रदान) करता हूं जिससे 
तुम जीवित रहकर उनकी इज्जत और हमें याद करो 
और जो इन  वस्तुओं से महरूम हैं, जिनके पास खाने पहनने 
की कमी है उनकी सहायता करो । 
यही कारण है लोग ईद में जकात (दान) उन जरूरत मंदो को 
देते हैं जिनके पास खाने , पीने की कमी। होती है ।
***क्या आप को मालूम है इस्लाम में १०//% ही लोग 
ईद के रोजे में एक महीने तक मांस को नहीं खाते हैं ।
जबकि मांस खाना इस्लाम में सुन्नत। माना जाता है ।
उनका मानना है कि इस गोस्त के अलावा खाने के लिए 
दुनियां में अल्लाह ने हजारों वस्तुओं का निर्माण किया है 
जिसका रूबरू इस ईद के समय हमें करता है 
दूसरा कारण अगर हम एक महीने मांस को नहीं खाते 
तो इतने मांस पर्याप्त हो जाते है कि साल के इग्यारह महीने
हम मांस की कमी नहीं होती है । और उन सब को खाने को 
मिल जाता है जो इससे महरूम रहते हैं।
ऐसी कई बातें इस्लाम के अंदर हैं जो हमारे बीच नहीं आती 
या उन्हें हमसे छुपाया जाता है ऐसा क्यों किया जाता 
ये तो हमे पता नहीं ,।
आज दुनियां में इस्लाम बदनाम हो रहा है इसका कारण 
उन मौलवियों , गुरुओं , जो इस धर्म को चलाते हैं 
जो इस्लाम की उस सच्चाई से लोगों को रूबरू नहीं कराते
जो सत्य है।
वरना जिसे पहले कलमे (श्लोक) में ही बता दिया गया है 
की वो अल्लाह जो निहायती रहम दिल वाला है जिसे हमारे लिए हर चीज प्रदान किया है जिसका एक मूल्य भी नहीं मांगता , वो भला हमे सजा कैसे दे सकता है ।
उसका मजहब इतना क्रूर कैसे हो सकता ।
ये बात आज भी हमारे समझ में नहीं आती । हमने बीस साल 
इस मजहब के करीब रहा हूं ।





Note।।।।

Is लेख को सिर्फ समझने की जरूरत है यह किसी के दिमाग के समझ कि 
व्याख्यान है  इससे किसी को ठेस पहुंचाना नहीं है ।
अगर कोई त्रुटि हुई हो तो उसके लिए हम माजरा चाहेंगे ।
धन्य वाद ।।।।।।।।







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