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America and india

India and America(इंडिया और अमेरिका



Hindi me gyan

इंडिया और अमेरिका की समानताएं (Similarities between India and America )


आज के समय में दुनियां के सबसे अमीर , सुपर पॉवर , देश 
America जिसे हम न्यूज , टीवी , पेपर , मैगजीन , और कुछ 
बुध जिविओं के लिखे इतिहास के माध्यम से हम को 
जानकारी मिलती है कि अमेरिका। ऐसा। देश है, पर आज इकिस्वी सदी में जब हम इस काले गोरे का भेद भाव की 
खबरे देखते या समाचार पेपरों में पढ़ते हैं तो हम सोचने पर 
मजबूर हो जाते हैं कि ये तो भारत से भी गया गुजरा है ।
वो अमेरिका जहां प्रति आदमी की आय लाखों में है ।
जहां खाने पीने को लेकर और ऐसो , आराम हर चीज 
मौजूद है आज अगर काले , गोरो , के भेद भाव में गिरा है 
तो इसके पीछे कुछ तो वजह जरूर है , जो हमसे छुपाया जाता
या फिर मीडिया हमें  या किताबें हमें सच बताती नहीं हैं ।
अगर हम भारत से समानता देखें तो इतिहास से हट कर 
बहुत कुछ एक सा नजर आता है ।
क्यों की दोनों देशों पर अंग्रेजो का कब्जा रहा हैं और दोनों देश 
किसी ना किसी वजह से आज भी चर्चा का विषय बने रहते हैं 
इस लेख में  हम उन्हीं पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे जो आज भी 
दोनों देशों में अपनी, अपने जड़े जमाए बैठी हैं ।
पहले हम america per प्रकाश डालेंगे उसके बाद भारत पर कुछ गौर करेंगे , ये सब करने के लिए कुछ इतिहास पर भी नजर डालेंगे और कुछ अपने आत्म चिंतन से भी गौर करेंगे ।
कि दोनों देशों में ऐसा क्यों समय , समय पर ऐसी घटनाएं 
होती हैं जो  हमारे पूरे सिस्टम को हिला के रख देती हैं 
और हम दूसरे देशों में हसीं के पात्र बन जाते हैं ।

Black and White काले

 और गोरे का इतिहास 

जब हम इतिहास के पन्नों में     america के बारे में कुछ जानकारी हासिल करते हैं तो अमेरिका का इतिहास कुछ 

१३ वी १४ वी इस्वी में कोलंबो नामक दार्शनिक ने अमेरिका 
को खोजा था इतिहास बताते हैं कि निकला था वो दार्शनिक 
भारत को खोजने पर रास्ता भटक जाने की वजह से 
ओ पश्चिमी दिशा में जाते वक़्त एक द्वीप पर पहुंचा 
जहां कुछ लोग वहां मिले और उस द्वीप  को ओ भारत समझ 
कर वहां के लोगों को रेड इंडियन का नाम दिया और वापस 
अपने देश स्पेन आकर कहा हमने भारत को खोज लिया ।
फिर यूरोपीय देशों ने वहां से समुद्री जहाज से व्यापार करना 
सुरु कर दिया कुछ दिन बाद और कई ऐसे द्वीप का पता चला 
जहां लोगों का रहना था एक नया मोड़ तब आया जब ameriko isppuchi नामक वक्ती ने और द्वीपों को खोजा 
बाद में उन सभी द्वीपों को मिलाकर  इस americo isppuchi नाम के व्यति पर उस द्वीप। का नाम अमेरिका पड़ा ।
पर इतिहास में काले और गोरे का कोई जिक्र नहीं मिलता 
कोलंबो को जो आदिवासी मिले थे वो काले। थे या गोरे थे 
बस उनका नाम रेड इंडियन रख दिया  गया ।
लेकिन आज कुछ  समाचारों , टीवी देखने से मालूम होता  
है कि अमेरिका में आज भी वो द्वीप मौजूद है जहां पर रह रहे लोगों को रेड इंडियन कहा जाता है और वहां किसी और व्यक्ति 
का जाना अमेरिका सरकार ने प्रतिबंधित कर रखा है ।
जैसे सऊदी सरकार ने मक्का और मदीना में गैर कॉम का जाना मनाही कर रखा है । पर कुछ लोगों के अनुसार उस द्वीप पर 
जो रेड इंडियन रहते है वो काले लोग हैं और ओ आज भी 
अपने उस पुरानी परम्परा का पालन करते हैं । जो उनके समुदाय में सदियों से चली आ रही हैं ।
और वो उसी प्रकृति नियमों का पालन करते हैं जैसे हमारे पूर्वज किया करते थे , आज अमेरिका जैसे देश जो हर क्षेत्र 
में दुनिया की हर सुविधायों से लैस हैं पर ओ द्वीप इन सुविधाओं से कोसो दूर हैं ।
कहते हैं जो वहां जाता है वापस नहीं आता है । इस बात से 
ये प्रमाण मिलता है कि अमेरिका पर सैकड़ों सालों तक 
राज करने वाले अंग्रेज भी उस द्वीप पर राज नहीं कर पाए 
और शायद अंग्रेजो को वहां से कुछ सबक मिला हो जो 
वो बताना नहीं चाहते और वो सबक अमेरिका को भी 
मालूम हो इस लिए उस द्वीप के खिलाफ कुछ नहीं करता ।
आप सभी को मालूम हो कि अमेरिका में रेड इंडियन को 
आदि वासी कहा जाता है।
या फिर उन अंग्रेजो की बनाई हुई कुछ सिद्धांत हो जैसे भारत 
में बनकर आज भी राज कर रहे हैं । क्यों की अमेरिका के आजादी के बाद पहले अमेरिकी राषट्रपति अंग्रेजो ने ही चुना था और अपने गोरे व्यक्ति को राष्ट्रपति बनाया और अपना ही 
संविधान लागू किया जो आज भी चल रहा है और उसी समय से ये काले , गोरे का भेद भाव पनपा है 
इस काले , गोरे के चक्कर में कई लड़ाई भी हुई ।
जब १८ वी सदी में अब्राहम लिंकन राष्ट्रपति बने तो कहते हैं 
लिंकन ने काले, गोरे के भेदभाव को समाप्त करने की 
बहुत कोशिश भी किया और लड़ाई भी लड़ी । और जीते भी 
पर कुछ तो हुआ होगा जिसे आज भी नहीं समाप्त किया जा सका ।
जिस तरह भारत में हिन्दू मुस्लिम का मुद्दा चलता है , उसी तरह 
अमेरिका में भी काले गोरों का मुद्दा चला आ रहा है ।
काले लोग कहते हैं अमेरिका के मूल निवासी हम हैं और गोरे लोग कहते हैं कि अमेरिका के मूल निवासी हम हैं ।
इनका फैसला करने की कोशिश आज तक किसी ने नहीं की 
बस अपने राजनीतिक का फायदा उठाया है ।
जिस तरह हमारे देश में होता आ रहा है ।
इन सभी मुद्दों पर आत्म चिंतन करते हैं या फिर हम अपने 
इतिहास के पन्नों को पलटते हैं तो ये पाते हैं की हमारा 
भारत पहले सोने की चिड़िया या विश्वगुरु ऐसे ही नहीं कहलाता है क्यों कि पूरे ब्रह्मांड की जानकारी हमारे संस्कृति में मिलती 
है वो बात अलग है कि लोग मशहूर होने या ख्याति पाने के लिए अपना नाम इतिहास में अपना नाम जोड़ देते हैं ।
अमेरिका का इतिहास हजारों साल पुराना है ये कोई कोलंबो या 
Americo simppucji  की खोज नहीं है ये सिर्फ अंग्रेजो 
की बनाई हुई एक मिथ्या मात्र है । को अमेरिका के इतिहास पर एक पर्दा डाल दिया गया है 
हमारी भारतीय संस्कृति में रामायण का जीवन में बड़ा महत्व है 
जो दुनियां के हर कोने की जानकारी देता है  बस उसे हमें अच्छी तरह समझना होगा ।
हम सभी को पता है दुनियां गोल है 
इसलिए जब हम अपने सूर्य उदय की दिशा की ओर मुख करके
खड़े होते हैं तो पीछे हमारे पश्चिम दिशा आता है और पश्चिम दिशा में ही अमेरिका देश है ये हम आज अपने किताबों में भी पढ़े हैं। और सूर्य देव जब डूबते हैं तो अमेरिका में सुबह होती है
इस तरह सूर्य देव हमारे खड़े होने की स्थिति से बारह घंटे बाद फिर पूर्व में उदय होते हैं पर यहां कुछ ध्यान करने योग्य है कि 
सूर्य देव हमारे उपर से नहीं बल्कि पैर के नीचे से होकर पश्चिम से पूर्व दिशा में उदय होते हैं ,इस प्रकार हम अपने धर्म ग्रंथो 
में पृथ्वी को तीन भागों में बांटा गया है उपर आकाश, बीच में धरती, नीचे पाताल 
हमारे संस्कृति के रामायण के हिसाब से अमेरिका पाताल में बसा है , जिसका वर्णन रामायण के अहिरावण नामक 
राजा जो पाताल का राजा था जिसने राम को अपने यहां 
कैद कर लिया था तब हनुमान जी ने उस पाताल लोक की 
खोज की और वहां पर उनको अपने बेटे मकर द्वाज से मुलाकात हुई और वहां से प्रभु श्री राम को छुड़ाकर कर 
धरती लोक में लाए थे वहां के लोगों का वर्णन रावण के  
वंस रावण के वांस से किया जाता है क्यों की अही रावण 
रावण का भाई था इसका श्याम रंग से वर्णित किया गया है
इस तरह श्याम का अर्थ कला होता है  इस लिए अगर 
अमेरिका का मूल निवासी देखा जाएं तो काले लोग ही हैं ।
पर आज के समय में इन सब बातों को समझना हर किसी के परे है क्यों कि हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं 
हमें  अपने विद्यार्थी जीवन में ये सब बताया ही नहीं जाता है 
क्यों की हमारे देश का संविधान ही ऐसा बना है ।
आज के समय में किसी को किसी से कष्ट नहीं चाहिए 
फिर भी कष्ट में जी रहे हैं ।
इसलिए बेहतर होगा कि अमेरिका को इन काले गोरों के भेद भाव का कोई ठोस हल निकालने की जरूरत है ।
या फिर कोई कड़ा कानून पास करने की जरूरत है। ताकि 
कोई भी एक दूसरे के खिलाफ कोई आवाज ना उठाए ना ही 
किसी भी जगह कोई भेद भाव किया जाए  सबको एक समान 
इंशाफ मिले । 
आज इस covid 19 महामारी काल में अमेरिका में पुलिस द्वारा एक अश्वेत वक्ति  को गला दबाकर के मार देना ।
फिर वीडियो को मीडिया द्वारा फैला देना , इतना ही नहीं कई दिन बीत जाने पर भी उस पुलिस कर्मी पर कोई कारवाई का 
ना होना , पूरे अमेरिका में अश्वेतों द्वारा विरोध प्रदर्शन करना 
आज के समय में शुभ संकेत नहीं है। हमें इसका हल किसी तरह जरूर निकालना होगा । धन्य वाद।।।।

(What is India's problem)क्या है भारत की समस्या 

अमेरिका की तरह भारत भी एक दूसरे के भेद भाओं में 
सदियों से जल रहा है , दोनों देशों में फर्क इतना है कि अमेरिका अपने मूल होने के भेद भाव में जल रहा है 
वहीं भारत धर्म religion me उलझा हुआ है ।
जहां तक भारतीय  इतिहास पर नज़र डाले तो दोनों 
को उलझाने का काम एक ही शासन ने किया वो 
है अंग्रेज , पर आज तक उसका हल नहीं निकला गया 
इसकी पीछे क्या वजह है के जिसे हमें पूरी सच्चाई से 
क्यों नहीं बताया जाता ।
भारत में तो इसे हिन्दू , मुसलमान के झगड़े में अंग्रेजो ने 
दो हिस्से भी कर डाले फिर भी हिन्दू , मुसलमान का झगड़ा 
आज भी नहीं थमा है ।
इतिहास से  अगर हम इसके बारे में नजर डालते है तो 
दिमाग में कई सवाल पैदा कर देते हैं ।

(Is the truth of India's history hidden from us)

  क्या भारत के इतिहास की  सच्चाई हमसे छुपाई गई है ?


अगर हम आज इस झगड़े की वजह नहीं जान पा रहे हैं तो इसकी वजह कहीं ना कहीं हमारी वो पीढ़ी यां हैं जिसने 
इसकी शुरुआत की ,आज हम जातिवाद , धर्म वाद 
आदि अनेक पंथों से गिरे हुए हैं । क्यों कि हम भारत के इतिहास का पूर्ण ज्ञान नहीं है और जो भी ज्ञात है वो 
देश की राजनीति और जातिवाद में हमें उलझा के ऐसे रखा गया है कि हम उन संविधानों नियमों को बदलने की तो दूर 
उनके खिलाफ कोई आवाज भी उठाने को भी नहीं सोच सकते 
अगर उनके खिलाफ कोई आवाज उठाते है तो हमें देश 
द्रोही घोषित कर दिया जाएगा ।
सोचने वाली बात ये है कि हम अपनी जिंदगी जीने के लिए 
अपने भारत देश में धर्म से लेकर भाषा , भेष भूषा , आदि 
सारी चीजें बदलने का हक हमारे पास होता है पर सालों से चली आ रही लड़ाई ,जातिवाद, धर्मवाद, को हम नहीं बदल सकते , क्यों कि हमारा संविधान को अंग्रेजो ने ऐसे बनाया ही 
है बस हमर लड़ने के लिए उसपर नाम किसी और महापुरुष 
का नाम चिपका दिया है ।
हमने अपने जिंदगी के अनुभवों से ये अहसास किया है कि 
भारत के इतिहास में कोई भी महापुरुष अगर सही काम किया 
है तो उसे अंत में सही परिणाम मिला है ।
आप इतिहास में एक बार झांक उसपर चिंतन करें तो आप को 
खुद अहसास होगा कि हमारे इस युवा पीढ़ी के साथ कुछ तो 
धोखा ही रहा वरना हम अपने देश की खाकर उसके खिलाफ 
नारे नहीं लगाते ।
आज सत्तर साल हुए आजादी मिले फिर भी आजादी 
 मांगते फिरते हैं।
आज जबकि हमारे देश की आबादी पूरी दुनियां की आबादी की साठ प्रतिसत है , ऐसे समय में हम हम इन लड़ाई , झगड़ों में उलझे हुए हैं ।
ऐसा क्या हुआ चालीस के दशक में हमको आजादी की एक पर्दा डाल दिया गया, और हम आजाद भारत के नागरिक 
होकर अपने देश में ही गृह युद्ध को झेल रहे हैं।
क्या आजादी एक दिखावा था क्यों कि अंग्रेजो के गुलाम में 
इतने नागरिक नहीं मरे थे जितने आजाद भारत के भारत और 
पाकिस्तान के बटवारे में मारे गए थे।
जबकि देश को अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जिन्होंने 
देश को आजाद कराया था , बंटवारे के समय वो भी 
जिंदा थे , जिन्हे जिंदगी के आखरी पड़ाव में गोलियों से मरना पड़ा , कुछ तो वजह रही होगी जिसको हम सब से छुपाया गया।
जिस तरह हम अपने जिंदगी जीने के लिए अपने जाति से लेकर अपने कर्म को बदल दे रहे हैं। उसी तरह हमे संविधान के कुछ पन्नों को भी बदलना होगा ।
जिसको अंग्रेजो ने हमारे ऊपर थोप रखा हैं ।
आज हम अपने आप में इतने उलझे हुए हैं कि हमें आने वाले 
भविष्य का ख्याल ही नहीं है ।
हमें आजादी दिलाने वाले लोग और सत्ता पर काबिज लोग कितने सही हैं इसपर हमें चिंतन करने की जरूरत है ।
हर धर्म में कर्म को ही प्रधान माना गया है ।
इतिहास गवाह है कि युग कोई भी रहा हो चाहे वो राजा हो 
या प्रजा उसको उसके कर्म के अनुसार ही उसे  दंड मिला है 
आज भी कुछ सवाल मन में उत्पन होते हैं कि अगर गांधी जी
सही थे तो उन्ही के खास दोस्त नाथू राम गोडसे ने क्यों मारा ।
अगर भीम राव अंबेडकर सही थे तो उन्ही की पत्नी ने उन्हें जहर देकर क्यों मारा । अगर इन्दिरा गांधी जी सही थी तो उन्ही 
के बॉडगार्ड ने क्यों मारा , अगर राजीव गांधी जी सही थे तो 
एक लड़की के हाथों क्यों मरे ।
ए सब पड़ने के बाद के अंदर ख्याल आएगा ये कही गांधी विरोधी तो नहीं । पर ऐसा नहीं आप अपने अंतर मन्न से पूछिए 
आपको आप के  सवाल का जवाब मिल जाए गा ।
इससे हट ये आप को प्रकृति से खिलवाड़ करने वाले की 
भी कुछ लोगों के बारे में बताऊंगा जिसे हम आज अपने 
साइंस , इतिहास के किताबों में पढ़ा करते हैं ।
आप को पता होना चाहिए कि जिसने भी प्रकृति के नियमों से
खिलवाड़ किया या ईश्वर की रचना के आगे अपना नाम दिया 
वो उसी तरह मरा या उसकी ओ हिस्से को ईश्वर ने छीन लिया है ।
मै कुछ सबूत आपके सामने दूंगा शायद आपको कुछ अटपटा सा लगे मगर आप इस लेख को पढ़ेंगे और उसपर गौर करेंगे तो
आप को जरूर एक दिन समझ में आएगा ।
बिजली  के तरंग , बल्ब का आविष्कार करने वाला एडिसन 
अपने जिंदगी के आखरी दिनों में सुनने की क्षमता को खो दिया 
जिस रेडियो की तरंगों को हम अपने कानो से सुनते हैं वो खुद ही उससे महरूम रहा ।
हवाई जहाज का आविष्कार किया तो एक भारतीय ने था पर 
उसपर अपना नाम देकर अपने ही बनाए जहाज में मर गया।
ग्रहों पर जीवन खोजने वाला इस्टिफन खुद व्हील चेयर के सहारे जिंदगी गुजारी।
Micro soft company, से धोखा दे कर नया कंपनी 
बनने वाला खुद सालों तक खून का मल त्याग करता रहा 
ऐसे बहुत उदाहरण हैं इतिहास में ,आप सब इस उदाहरण 
से समझ गए होंगे ।
जीवन में मनुष्य को बिना कष्ट के नहीं जी सकता अगर ईश्वर ने 
इस पृथ्वी कि रचना कर मानव के हाथ सोप दिया है तो इसका मतलब ये नहीं कि हम कुछ भी करते रहे ।
अगर हम इस धरती पर जन्म लेते हैं तो खुदा भी हमारे साथ 
उस कर्म जिसे क्वालिटी कहते हैं , ईश्वर हमें पैदा होने के साथ 
ही देता है पर अगर वो हमारे अनुरूप नहीं हुआ तो हम जीवन भर  ऐसे ही परेशान रहते हुए मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं ।
इस लिए उस अंग्रेजो के द्वारा बनाई हुई गुलामी संविधान 
को हम सब को मिलकर उसका तिरस्कार करना होगा 
तभी हमारी पीढ़ी सही होगी ।
अंग्रेजी समुदाय की की कुछ रोचक बातें उनके बारे में 
हम अगले लेख में पढ़ेंगे ।


Note

ये लेख लेखक के आत्म चिंतन का एक अनुकरण है इस लिए ये किसी को कष्ट पहुंचने के उद्देश्य से नहीं लिखा गया है अगर इससे किसी को कोई ठेस पहुंची ती है तो उसके लिए माफी चाहेंगे
धन्य धन्य।।।।।।।





















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