Faimly relation (परिवारिक संबंध)



परिवारिक संबंध के बारे में कुछ जानकारी



आज के युग में परिवारिक रिश्ते  बस नाम के रह गए हैं 
कहते हैं आज से  कुछ साल पहले एक सयुक्त परिवार में अगर एक परिवार में दस  ,बारह लोग रहते और उनका पालन पोषण करने वाला परिवार का एक ही मुखिया होता था जो उस पूरे परिवार को संभालता था पर आज ऐसा नहीं है अपने बचपन के समय की बात बता रहा हूं हमारे परिवार में में हमारे पिता अकेले ही थे हम सब का भरण पोषण करने वाले उसके बाद हम दो भाई उस परिवार का हिस्सा हुए , जैसे , जैसे हम 
बड़े होते गए हमारे सामने तरह , तरह की तकलीफें पैदा 
होती गईं और आज हम उन तकलीफों से इतने गिर गए कि
आज अपने परिवार में मानसिक तनाव से ग्रस्त अपने भाई को 
खो दिए आज अपने ही परिवार की घटनक्रमों का विस्लेशन
करता हूं तो कई खामियों को पाता हूं जिसका ज़िक्र मै इस लेख में करने जा रहा हूं । इसपर आप आत्म चिंतन कर के 
अपने परिवार को एक नई दिशा दे सकते हैं


संयुक्त परिवारों में फुट का कारण 

संयुक्त परिवारों में आज फुट का मुख्य कारण आज की जीवन शैली और लोगों का अपनी संस्कारों से दूर होते जाना है 
भारत ही एक ऐसा देश है जिसके हर  हर गूढ़ में एक रिश्ते का 
नाम और पहचान दिया गया है , पर आज बाहरी आचरण 
और बदलते लाइफ स्टाइल ने हमारे परिवारिक रिश्ते में एक 
अलग तरह के मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
हम आज बचपन से लेकर किशोर अवस्था तक 
ऐसे पलते, बढ़ते जा रहे हैं कि तरुण होने पर हम अपने परिवार 
मां , बाप से अलग जीना पसंद कर रहे हैं।
आज हम अपने आप में इतने उलझे हुए हैं कि हमको पास पड़ोस का तो दूर अपनो का ही ख्याल नहीं रहता ।
आज हम भी रह रहे हैं हमारे आस पास कोई बीमार , या कोई 
घटना हो जाती है हमको पता तक नहीं चलता।
आज हमारी जरूरतें इतनी बढ़ गई हैं कि हम उन पर अपनी कमाई का तीन हिस्सा खर्च कर दे रहे हैं और जो एक हिस्सा बचता वो अपने बीबी , बच्चों के आगे भविष्य के लिए बचाने 
की कोशिश में लगे हुए हैं।
हमें अपने मां बाप की सेवा के लिए समय नहीं हैं अगर आज के दौर में सारा दोस आज की युवा पीढ़ी को दिया जा रहा हैं तो 
ये सरासर ग़लत होगा । इसमें उस मां , बाप की भी गलती है 
जो अपने बच्चों का परवरिश , संस्कारों में बदलाव करते जा रहे हैं ।

मां बाप का परिवार में अहम भूमिका,

आज के युग में जब हम एक बाप बन जाते हैं तो अपने बच्चो को बचपन में ही पालने घर में डाल देते हैं । क्यों की हमारे पास समय नहीं रहता हम अपने जीविका चलाने के लिए पति पत्नी 
दोनों पैसे कमाने में लगे हुए हैं। और उस पैसे में से थोड़ा खर्च 
कर बच्चे को पालने घर में डाल ना बेहतर समझते हैं ।
जिससे उस वो बच्चा मां के दूध और उसके स्पर्श से वांछित 
होता जाता है कहते हैं जिस पेड़ को खाद, पानी समय समय पर देते हैं वो एक दिन फल जरूर देता है मगर जंगल में हमें जो पेड़ मिलते है वो फल देंगे या नहीं ये हम नहीं जानते क्यों की 
उनकी खाद, पानी देख भाल नहीं किए होते हैं इस लिए 
उनके बारे में हमें पता नहीं होता ।
उसी तरह जब हमारे बच्चे हमारे साथ नहीं रहते तो मां बाप के 
प्रति उनका झुकाव कम होने लगता है बच्चे अपने मां बाप के संस्कारों से दूर हो जाते है बस उनके अंदर वो जींस रह जाता है 
जो उस रिश्ते को बनाए रखता है । ये सब गांवो की अपेक्षा 
शहरों में ज्यादा हो रहा है ।
आज के बच्चे बचपन में पालनाघर , थोड़ा बड़ा होने पर 
हॉस्टल ऐसे वो जैसे जैसे बड़े होते जाते हैं उनकी लाइफ 
स्कूल, की किताबों , और दोस्तों के साथ गुजरने लगती हैं 
फिर किसी कंपनी , या सरकारी नौकरी में चले जाते हैं 
उसके बाद किसी से प्यार करते और शादी रचा कर अपनी लाइफ को उसी मोड़ पर लाकर खड़ा कर ते हैं जहां उनके मां बाप ने अपने को खड़ा किया था ।
इस तरह जिंदगी नोक झोक के के बीच चलने लगती है।
उन मां बाप को अपने जिंदगी और अपने बच्चों के बारे में तब अहसास होता है जब उनके बच्चे उन्हें किसी वृद्धा आश्रम या 
अकेला छोड़ विदेशो में चले जाते हैं और वो मां बाप तब जाकर 
अहसास करते है कि हमने अपनी जिंदगी में कितनी बड़ी गलती की ।
कहते हैं इंसानी रिश्ते चाहे कैसे भी निभाएं पर उन रिश्तों में हम 
जो भी गलतियां करते हैं देर सबेर उन गलतियों का पछतावा 
होता जरूर है ।
आज पश्चिमी देशों में फैमली मैटर इस कदर बढ़ गए हैं कि एक इंसान के कार्य करने की अवस्था जैसे जैसे कम होने लगती है 
ओ उम्र के उस पड़ाव पर चला जाता है जहां सबकुछ होते हुए 
अपने आप को अकेला महसूस करता है , तब वो ऊपर 
वाले से मौत की दुआ मांगता है ताकि उसे मौत आ जाए 
कई पश्चिमी देशों में तो इच्छा मृत्यु का कानून तक बना है 
ताकि इंसान अपने इच्छा से सरकार द्वारा मृत्यु को प्राप्त कर 
सके , ये कानून हमारे भारत देश में में लागू कर दिया गया है ।
और ये पश्चिमी सभ्यताएं अब हमारे देश में भी पैर पसारना 
चालू कर दी हैं , हमें इन तथ्यों पर विचार, मंथन करना होगा 
और अपने बच्चों को पूरा समय उनके लिए देना होगा ताकि 
उनको इन रिश्तों से जुड़ाव जिंदगी के अंतिम छोर तक रहे ।
हमको अपने जिंदगी के पन्नों को अपने बच्चों में शेयर करना होगा ताकि वो हमसे भी कुछ सीख सकें।
अपने उन संस्कारों को उनके अंदर उतारना होगा जो हमे अपने मां बाप से मिला ।
कभी वो जिंदगी में असफल हो तो उन्हें डाटने के बजाय 
उनका हौसला बढ़ाने पर जोर देना होगा ।
जब वो बड़े हो तो उनके साथ एक दोस्त की भाती उनके साथ पेस आना ही एक मा बाप की भूमिका होना जरूरी होगा ।
ऐसी कई युक्तियां हैं जिससे हम अपने जिंदगी को उन रिश्तों के साथ एक बेहतर कल दे सकते हैं ।













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