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नाग पंचमी


 नागपंचमी




नागपंचमी भारत का एक प्रमुख त्योहार है ।
हर त्योहार की तरह इसकी भी अपनी एक अलग 
पहचान है ।
नागपंचमी भारतीय हिंदी महीने के हिसाब से सावन 
 महीने के शुक्ल पक्ष के पंचम तिथि को।मनाया जाता है।
यह त्योहार भारत के लगभग हर हिस्से में मनाया जाता है ।
नागपंचमी भारत के अलग अलग प्रान्तों में अलग अलग
किस्सो ,कहानियों के आधार मनाया जाता है ,इस त्योहार के मनाने के पीछे हमारे धर्म ग्रंथो में 
कई पौराणिक कथाओं का वर्णन मिलता है।
उन्हीं कथाओं का कुछ वर्णन इस लेख में आप सभी को 
मिलेगें।

भारत मे नागपंचमी क्यों मनाया जाता है इसके पीछे क्या सत्य है ?

दुनियां में भारत ही ऐसा देश है जहाँ हर छोटी बड़ी 
त्योहारों के पीछे कुछ ना कुछ घटनाएं या कहानियां 
घटी होती हैं जिसको याद रखने या परंपरा को निभाने 
के उपलछ्य में तीज, त्योहारों के रूप में मनाते हैं।
नागपंचमी त्योहार मनाने के पीछे उन जीव जंतुओं 
जिसको ईश्वर ने पैदा किया या फिर खुद भगवान 
उस रूप में अवतरित हुए ,और अपनी लीलाओ से 
मानव जाति के हृदय में एक छाप छोड़े जिसको 
हम आज भी इन त्योहारों को मनाकर उनको 
याद करते।हैं और उन दुख बलाओं से बचे रहते हैं।
इसी तरह नागपंचमी मनाने के पीछे उस कथा का वर्णन 
ज्यादा होता है जिसका इस लेख में आपको पढ़ने को मिलेगा ।
कहते हैं किसी bharat के kisi राज्य में महाजन सेठ हुआ करते थे ,जिसके  सात पुत्र थे । सेठ जी के सातों पुत्रों का शादी ho चुकी थी सातो बहुए एकसाथ ही रहा 
करती थीं ।
सातों बहुओं में सबसे छोटी बहू के पीहर (माइका) 
में कोई नही था ।इसलिए छोटी बहू जब उसके जेठानियाँ अपने ,अपने मायके जाती थीं तो वो थोड़ी दुखी हो जाती थी और सोचती रहती कास हमारे मायके में भी कोई होता ।
एक दिन घर मे कुछ त्योहार पड़ने के कारण बड़ी बहू ने 
अपने छोटी देवरानियों को घर लीपने के लिए पीली 
मिट्टी लाने के लिए कहा और मिट्टी लेने गाँव से कुछ दूर 
अपने देवरानियों को लेकर चली गई ।
वहां जाकर खुरपी से मिट्टी बड़ी बहू खोदने लगी 
तभी वहां एक साँप देख कर उसे मारने लगी यह देख कर छोटी बहू जिसके पीहर में कोई नही था चिल्लाई 
दीदी मत मारिये और उसे बचा कर साँप नागराज से 
दूध पिलाने का वादा कर के घर चली गई ।
घर जाने पर सब बहुएं अपने अपने कामों में व्यस्त हो गई छोटी बहू भी व्यस्त हो गई । और नाग से दूध पिलाने का ध्यान ही नही रहा ।
दूसरे दिन जब छोटी बहू को नाग को दूध पिलाने का ध्यान आया तो वह जल्दी से दूध लेकर जाने लगी 
वहां पहुँच कर देखा कि नागराज उसी जगह 
बैठे हैं यह देख कर बहु ने नागराज से कहा 
भैया हमे माफ कर दो मैं कल।काम।मे व्यस्त होने के कारण आपको दूध पिलाना भूल गई ।
छोटी बहू की बात सुन कर नागराज ने कहा 
तुमने मुझे भाई माना है इस लिए मैं तुम्हें 
छोड़ रहा हु वरना मैं तुम्हे आज डस लेता ।और आज से तुम्हे जो भी परेशानी आये हमे अपना भाई समझ कर याद करना मैं तुम्हारे पास आ जाऊंगा । इतना कह कर 
नागराज अंतर ध्यान हो गए और बहू अपने घर चली आई ।
कुछ दिन बीत जाने के बाद सेठ की बहुएं अपने अपने 
पीहर के यहां जाने लगी ,छोटी बहू के पीहर के वहां 
कोई ना होने के कारण वह घर पर ही थी तभी सेठ के घर एक नवजवान आया और छोटी बहू के पीहर के दूर का रिस्तेदार  बता कर अपने साथ ले कर गया कुछ दूर जाने के बाद वह अपने असली नाग के रूप में 
आकर छोटी बहू से कहा बहन मैं जानता हूं तुम्हारे 
मायके में कोई।नहीं है इस।लिए मैं आदमी का रूप धर
कर तुम्हे अपने घर नागलोक लेजाने आया हु ।
इस तरह छोटी बहू अपने भाई नाग के साथ नागलोक 
चली जाती है ,वहाँ उसको नागराज अपनी माँ से 
मिलवाता है।और अपनी जान बचाने के बारे में बताता
है ।नाग की माता बहुत खुश होती है और उसे अपने 
बेटी की तरह मनाने लगती है ।
एक दिन जब नाग की माता नाग को दूध देती है तो कुछ काम पड़ जाने की वजह से छोटी बहू नाग को दूध देती है दूध गर्म होने के कारण नाग का मुंह जल जाता है । जब उसकी माँ को पता चलता है तो वह छोटी बहू 
को डसने जाती है पर बेटे के कहने पर मान जाती है ।
इस तरह कई महीने बीत जाने के बाद 
छोटी बहू घर जाने को कहती है फिर नाग और उसकी माँ उसको ढेर सारा सोना चांदी देकर उसे उसके ससुराल विदा करते हैं ।
छोटी बहू का भाई नागराज अपनी बहन को 
एक हीरों का हार उपहार स्वरूप देता है जिसमे अनेक मढ़ी जड़े होते हैं ।
छोटी बहू उस हार को पहन कर और सोने ,चांदी लेकर घर आई जब बड़ी बहू ये सब देखी तो छोटी बहू से 
ईर्ष्या करने लगी और उस समय ताना देकर बोली 
इतना सब कुछ लाई हो तो घर साफ करने के लिए 
एक सोने की झाड़ू भी ले आई होती ।
यह सुन कर छोटी बहू का भाई नागराज एक सोने की झाड़ू भी लाकर दे दिया ।
उपहार में दिया हुआ हार जब छोटी बहू पहनने लगी तो उसकी सुंदरता की चर्चा पूरे गांव में होने लगी और हार की खबर जब वहां के राजा को मिली तो छोटी बहू को 
राजदरबार में उपस्थित होने को कहा ।
जब छोटी बहू राजमहल पहुँची तो उस हार को महारानी 
को इतना पसंद आया।कि उसको सोने चांदी देकर ले लिया लेकिन छोटी बहू ने कहा कि ये जब दुसरो के गले में जाएगा तो ये साँप बन जायेगा ,पर उसकी बात किसी ने नही मानी ।
जब महारानी उस हार को पहन कर सीसे के सामने 
गई तो हार साँप की तरह दिखने लगा ।रानी डर गई 
दूसरे दिन छोटी बहू को राजा ने महल में बुलाया 
फिर सारी बात छोटी बहू ने राजा को अपने भाई नागराज के बारे में बताया ।
राजा ने छोटी बहू से माफी मांगी और पूरे राज्य में 
नाग राज को अपना भाई मान कर उसकी पूजा करने को कहा ।कहते हैं उसी दिन से नागपंचमी  पर्व मनाया जाने लगा ।
कहते है इस दिन नाग की पूजा और व्रत रहने से 
जीवन मे कभी काल सर्प दोष नही लगता है ।
इस दिन लोग नाग की पूजा और दूध  पिलाते हैं।
सपेरे सापों को लेकर घर घर उनके दर्शन कराते हैं ।

नागपंचमी के दिन गुड़िया को क्यों पीटा जाता है??

भारत के पूर्वी राज्यों में नाग पंचमी मनाने के एक मान्यता यह भी है कि इस दिन गांव की लड़कियां 
पुराने कपडों की गुड़िया बना कर और साथ मे चने ,मटर भिगो कर गांव के बाहर तालाब या नदी के किनारे 
जाती हैं ,उसके बाद बच्चे बड़े उस गुड़िया को अपने बनाए हुए लाठी जिसे बाड़ी कहा जाता है उससे उस गुड़िया ko पीटते हैं और लड़कियों से चने ,मटर खा कर 
स्नान करते हैं ।
कहते हैं कि किसी जमाने में एक राजा हुआ करते हैं उनकी एक पुत्री थी ।
एक दिन एक साँप को कुछ लोग मार रहे थे साँप अपनी जान बचा कर राजा की लड़की के पास गया और उसके अंचल में छुप गया और ना बताने का वादा किया 
लेकिन जब कुछ लोग साँप को खोजते राजा की लड़की के पास पहुँचे और साँप के बारे में कहा तब राजा की लड़की ने साँप को उन लोगों के हवाले कर दिया 
टैब साँप ने राजा की लड़की को श्राप दिया कि जिस तरह मैं लोगों से पीट रहा हूं उसी तरह तुमभी पीटी 
जाओगी ।
एक दिन ऐसा समय आया कि राजा की लड़की 
ने राजा की हत्या कर दी और लोगों ने उसे लाठी ,डंडो से पिट कर मार डाला ।
इस तरह साँप के श्राप से आज भी लोग राजा के लड़की की ki जगह गुड़िया बना कर नागपंचमी के दिन
पीटते हैं और उसके बाद स्नान कर के घर जाते हैं ।

नाग पंचमी से लाभ  

नाग पंचमी मनाने से हमे अनेक लाभ होते हैं ।
लोग इस दिन घर ,दुकान की साफ, सफाई करते हैं ।
इस दिन गाय के दूध के साथ लावा जिसको हम दूध लावा बोलते हैं ,नाग देवता को चढ़ाते हैं ।
घर को गाय के गोबर और पीली सरसों से पूरे घर को बाहर से घेरते हैं । इसके करने के पीछे ऐसी मान्यता है कि साँप घर के लोगों को कोई हानि नही पहुचाते हैं ।
नाग पंचमी के दिन लोग घर मे नाग देवता की आराधना करते हैं और घर मे सुख ,शांति की कामना करते हैं ।
इस दिन जिसके ऊपर काल सर्प दोष होता है ।
उसकी पूजा करते हैं तो उस दोष से छुटकारा मिल जाता है ।











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