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सावन




सावन महीने का भारतीय संकृति में महत्व 

भारतीय संस्कृति में बारह महिनों में श्रावण मास (सावन) महीने का एक अलग ही महत्व है ।
भारतीय परंपरा के अनुसार कहते हैं कि जीवन की 
उत्त्पत्ति  और अंत इस मास से ही प्रारंभ होता है ।
इस लिए इस माह को भगवान शिव (आत्मा)
का पवित्र माह माना जाता है  ।
इसलिए इस महीने में सम्पूर्ण मानव जाति 
शिव की आराधना में लीन रहता है ।और पूर्वजो द्वारा 
बनाये हुए अपने अपने धर्म में उन नियमों का पालन करता है जिसमे किसी जीव ,आत्मा का नुकसान 
ना हो ।
जो भी इंसान इस सावन मास का पालन करता है ।
उसके जीवन में कभी किसी प्रकार की क्षति 
नहीं होता है ।

भारत में सावन का महत्व

भारतवर्ष के महाराष्ट्र राज्य में सावन का बहुत बड़ा ही महत्व होता है ।
यहाँ लोग सावन में नियमों के पालन को सावन पालना
बोलते हैं ।
यहाँ के लोग सावन चढ़ते ही मांस ,मछली ,अंडा ,मदिरा 
सेवन पूरे महीने नही करते हैं ।
यहाँ के कोली समाज जिसे हम मछुआरे कहते हैं 
श्रावण मास के चढ़ते ही समुद्र में मछली मरना बंद कर देते हैं ,और पूरे महीने शाहकारी जीवन जीते हैं ।
जब श्रावण मास का अंत होता है तो पूर्णिमा के दिन 
जिसे वो नारियल पूर्णिमा कहते हैं ,उस दिन 
पूरे विधि विधान से पूजा पाठ कर के अपने नाव को समुद्र में उतारते हैं ।
भारत में महाराष्ट्र के अलावा दक्षिण भारत  में सावन मास का बहुत महत्व है । 
यहाँ सावन मास आते ही लोग घरों की साफ सफाई 
करके भगवान शिव की आराधना में लीन हो जाते हैं 
और पूरे महने सात्विक जीवन बिताते हैं ।यहाँ तक ये लोग पूरे महीने पैरों में चप्पल तक नहीं पहनते हैं ।
और फल ,फ्रूट खाकर सावन व्रत का पालन करते हैं ।
इसी तरह भारत के उत्तर प्रदेश ,बिहार ,छत्तीस गढ़, आदि अनेक राज्यों में सावन को पूरे महीने को भगवान शिव का पवित्र महीना के रूप में मनाते है 
यहाँ सावन के पूरे महीने शिव के मंदिरों में लोग गंगा से 
जल लेजा कर जलाभिषेक करते हैं ।
यहाँ भगवान शिव के केसरिया रंग में लीन कांवर से नदी से जल को लेकर लोग मंदिरो में जल।चढ़ाते हैं ।
यहाँ पूरे महीने भगवान शिव के मंदिरों में जलाभिषेक 
और मेला चलता है। इस तरह पूरे भारतवर्ष में हिंदी 
महीनों में सावन को बड़े ही धूम धाम
से लोग मनाते हैं ।

सावन में सोमवार का महत्व

जिस तरह हिंदी के बारह महीनों में सावन का महत्व 
ज्यादा होता है उसी तरह उस सावन में सातों दिनों में 
सोमवार का बहुत महत्व होता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार सोमवार भगवान शिव 
के जन्म और मृत्यु से परे ओ दिन है जिस दिन अनेक 
संहार कर नया जीवन दिया ,जिसे हम आज उनके 
कर कमलों पर चल कर मोछ को प्राप्त करते हैं ।
सोमवार के दिन ही शिव ने समुद्र मंथन से निकले 
हलाहल (बिष ) को पिया और संसार की रक्षा की थी ।
माता पार्वती का विवाह सोमवार के दिन ही संम्पन हुआ था ।
ऐसे कई काम भगवान शिव द्वारा सोमवार को ही हुआ 
हिंदी दिन की सुरुआत सोमवार से ही होती है ।
सावन के सोमवार को ही शिव ने संसार में अनेक जीव 
की रक्षा की और उनका उद्धार भी किया ।
माता पार्वती ने सोमवार का व्रत करके ही शिव को प्राप्त किया था ।इस लिए सावन के सोमवार 
कन्याओं के लिए अतिउत्तम है ।


प्राकृति के दृस्टि से सावन का महत्व 

प्राकृति की दृष्टि सावन का महत्व सब महीनों से ज्यादा है इसी महीने में अनेक जीवों की उत्पत्ति और गर्भधारण 
होता है सावन में ही जल की धारा चारो तरफ फैलती है जिसके कारण जीव से लेकर मनुष्य तक को खाने ,पीने की वस्तुएं तैयार होती हैं ।
संसार को चलाने के लिए प्रकृति हमें सारी चीजें इसी महीने में उत्पन्न करती है इसलिए सावन महीने में 
अनेक वनस्पति ,पेड़ को मनुष्य लगता है और शाकाहारी जीवन जीता है ।
भारतीय संस्कृति में हर जीव प्राणी की रक्षा और उनका संरक्षण करना सिखाया गया है ।
इस लिए सावन महीने की परंपरा आज भी जीवंत है ।और हर भारत वासी इसका पालन करता है ।

















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