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संस्कृति बचाव (रितु राठौर)

परिचयअनेक पुस्तकों की रचयिता रितु राठौर का नाम  भारत ही नहीं पूरे देश ,विदेश में प्रशिद्ध है । आज कल अनेको ट्रस्टों एवम सामाजिक कार्यो।में सम्लित होकर अपने वक्तव्य को लोगों तक पहुचाती  हैं । उनका बेबाक अंदाज ,वाणी लोगों के दिलों पर  एक छाप छोड़ कर जाती हैं । रितु राठौर भारत के धर्म ,संस्कृति ,को बचाने और  उनकी गरिमा को बनाये रखने के लिए हमेशा  प्रयासरत रहती हैं । इस लेख में इन्फिनिटी फाउंडेशन चैनल शो में मेजबान के तौर पर दिए गए भाषण में उन विचारों को  लिखा गया है जिससे आप सब को एक नई दिशा  मिल सके और कुछ धर्म ,अपने कर्म के ज्ञान को जान सके । रितु राठौर की जुबानी
नमस्ते !  मैं रितु राठौर हूं आज आप सभी के सामने  इस इन्फिनिटी फाउंडेशन चैनल शो के जरिये  अपने बात आप सभी के सामने रखने का मौका मिला है इसके लिए आप सभी को तहे दिल से धन्यवाद । हमारी तरह ऐसे कई कार्यक्रम विभिन्न लोगों द्वारा होस्ट किया जाएगा।   और प्रत्येक व्यक्ति का अपना स्वरूप, अपनी शैली, अपना व्यक्तित्व हो सकता है।   आप जानते हैं प्रत्येक मेजबान, प्रत्येक शो होस्ट तैयार करेगा, अनुसंधान करेगा, पता लगाएँ कि अतिथि कौन हैं, विषय क्या हैं ?  और जहां…

Hinduism

ब्रह्मा,विष्णुऔर भगवान शिव के पिता कौनहैं???

सावन

सावन महीने का भारतीय संकृति में महत्वभारतीय संस्कृति में बारह महिनों में श्रावण मास (सावन) महीने का एक अलग ही महत्व है । भारतीय परंपरा के अनुसार कहते हैं कि जीवन की  उत्त्पत्ति  और अंत इस मास से ही प्रारंभ होता है । इस लिए इस माह को भगवान शिव (आत्मा) का पवित्र माह माना जाता है  । इसलिए इस महीने में सम्पूर्ण मानव जाति  शिव की आराधना में लीन रहता है ।और पूर्वजो द्वारा  बनाये हुए अपने अपने धर्म में उन नियमों का पालन करता है जिसमे किसी जीव ,आत्मा का नुकसान  ना हो । जो भी इंसान इस सावन मास का पालन करता है । उसके जीवन में कभी किसी प्रकार की क्षति  नहीं होता है ।
भारत में सावन का महत्वभारतवर्ष के महाराष्ट्र राज्य में सावन का बहुत बड़ा ही महत्व होता है । यहाँ लोग सावन में नियमों के पालन को सावन पालना बोलते हैं । यहाँ के लोग सावन चढ़ते ही मांस ,मछली ,अंडा ,मदिरा  सेवन पूरे महीने नही करते हैं । यहाँ के कोली समाज जिसे हम मछुआरे कहते हैं  श्रावण मास के चढ़ते ही समुद्र में मछली मरना बंद कर देते हैं ,और पूरे महीने शाहकारी जीवन जीते हैं । जब श्रावण मास का अंत होता है तो पूर्णिमा के दिन  जिसे वो नारियल पूर्णिमा कहते हैं ,उ…

नाग पंचमी

नागपंचमी


नागपंचमी भारत का एक प्रमुख त्योहार है । हर त्योहार की तरह इसकी भी अपनी एक अलग  पहचान है । नागपंचमी भारतीय हिंदी महीने के हिसाब से सावन   महीने के शुक्ल पक्ष के पंचम तिथि को।मनाया जाता है। यह त्योहार भारत के लगभग हर हिस्से में मनाया जाता है । नागपंचमी भारत के अलग अलग प्रान्तों में अलग अलग किस्सो ,कहानियों के आधार मनाया जाता है ,इस त्योहार के मनाने के पीछे हमारे धर्म ग्रंथो में  कई पौराणिक कथाओं का वर्णन मिलता है। उन्हीं कथाओं का कुछ वर्णन इस लेख में आप सभी को  मिलेगें।
भारत मे नागपंचमी क्यों मनाया जाता है इसके पीछे क्या सत्य है ?दुनियां में भारत ही ऐसा देश है जहाँ हर छोटी बड़ी  त्योहारों के पीछे कुछ ना कुछ घटनाएं या कहानियां  घटी होती हैं जिसको याद रखने या परंपरा को निभाने  के उपलछ्य में तीज, त्योहारों के रूप में मनाते हैं। नागपंचमी त्योहार मनाने के पीछे उन जीव जंतुओं  जिसको ईश्वर ने पैदा किया या फिर खुद भगवान  उस रूप में अवतरित हुए ,और अपनी लीलाओ से  मानव जाति के हृदय में एक छाप छोड़े जिसको  हम आज भी इन त्योहारों को मनाकर उनको  याद करते।हैं और उन दुख बलाओं से बचे रहते हैं। इसी तरह नागपंचमी मनाने के …