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Eyesight medishin

आंखआंख हमारे शरीर का एक अभिन्न अंग है। आंख ना होने पर हम जीवन की सारी चीजें सिर्फ कल्पना  कर के ही महसूस कर सकते हैं । अगर देखा जाए तो शरीर में आंख का होना ही जीवन जीने के लिए बहुत जरूरी है पर हम आंख का देख भाल सही तरीके से नहीं कर पाते हैं । जिससे उम्र बढ़ने के साथ हमारी आंखे भी  धीरे धीरे कमजोर होती चली जाती हैं । और हमारा दिखाई देना  कम होने लगती है इस हालत में किसी को कम दूरी की समस्या  किसी को दूर की दूरी ना दिखाई देने की समस्या होती है । आज दुनिया में हर दस व्यक्ति में छह व्यक्ति को आंखो की  समस्या है । इनका मुख्य कारण आज की हमारी लाइफ स्टाइल है हम आज तरह तरह के रोशनी , लाइट, टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल से घिरे हुए हैं जो हमारे आंखो को दिन बा दिन नुकसान पहुंचा रही हैं। और हम कम उम्र में ही देखने के लिए चश्मा, कॉन्टेक्ट लेंस का सहारा लेने लगे हैं । हम जिम एक्सा साईज , योगा कर के अपने आप को स्वस्थ  रख तो लेते हैं पर इन सब के आगे अपने आंखो  पर कम ध्यान देने लगते हैं जिससे कुछ समय बाद ही हम आंख के रोगों का शिकार हो जाते हैं । आयुर्वेद में जिस तरह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दवा , पावडर ,suppliment है उ…

Desi Supplement

देशी नुख्से



जिम करने वाले को देख कर जिम ना करने वाले ये सोचते हैं कि इसने जरूर कोई दवा या पावडर लेते होंगे । पर कुछ लोगों के पास बाज़ार में उपलब्ध पावडर लेने और जिम जाने के फीस को अफोर्ड नहीं कर पाते । उनके लिए  आयुर्वेद की मदद से घर पर भी जिम ना कर के भी  आप देसी जिम कर के भी और कुछ चीज़ों  से आप पावडर  बना कर जिम जैसी बॉडी बना सकते हैं । जिम जैसी बॉडी बनाने के लिए अगर हम जिम नहीं जा पा रहे हैं  तो घर पर ही थोड़ा समय निकाल कर कुछ एक्सा साईज जैसे सूर्य नमस्कार, डिप्स, थाइस, और वर्क आउट करके  आप एक अच्छी बॉडी पा सकते हैं । इसके लिए आप को  अपने माइंड को अपने काम और अपने से जोड़ कर रखना होगा। इधर उधर के बातों पर और दूसरे से जलन आदि वहम  अपने दिमाग से दूर रखना होगा । हमेशा सकारात्मक विचार रखना होगा । कहते हैं हम जैसा सोचते हैं वैसा बन जाते हैं। इसके साथ अपने दिन चर्या पर भी ध्यान देना होगा , और साथ में कुछ दिए हुए चीज़ों का पावडर बनकर आप नियमित सेवन कर के आप अपने बॉडी को बिना जिम किए हुए भी एक  अच्छी सेव दे सकते हैं ।
देसी Suppliment बनाने के समान(१) १०० ग्राम काजू  (२)१०० ग्राम बादाम  (३) १०० ग्राम अखरोट  (…

Health Care

Saliva (लार)


लार इंसान या जानवर के मुख से निकलने वाले वो द्रव्य जिसे हम थूक के नाम से भी जानते है हमारे भारत में इसके फायदे के बारे में लोग ज्यादा ध्यान नहीं देते पर बाहर के देशों में  लार का इतना महत्त्व है के ये बाजारों में ५ से लेकर १० डॉलर  तक बिकता है । जानवरों के लार को अनेक बीमारियों के दवाइयों के बनाने में  उपयोग किया जाता है । लार मानव के शरीर से निकलने वाला एक प्रकार चिपचिपा  पदार्थ है जो शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है  हमारे किताबों और जीवन में लार पर अनेक कहावत पढ़ने और  सुनने को मिलता है । जैसे कि किसी चीज को देख कर लार टपकना, हमारे आयुर्वेदा में लार के कई फायदे बताए गए हैं । लार के कुछ फायदों की कुछ जानकारी आपको यहां पढ़ने को  मिलेगा जिससे आप उनका प्रयोग करके अपने जीवन को स्वस्थ रख सकते हैं।

 Saliva (लार) के फायदे,,,,,
लार के तो बहुत सारे फायदे हैं जिनमें से कुछ फायदों का  वर्णन यहां किया गया है जो इस प्रकार है।
(१)   अगर सुबह बासी मुंह गर्म पानी पीते हैं तो वो पानी          हमारे लार को पेट के अंदर लेजाकर  हमारे पाचन तंत्र           को मजबूत करता है ।
(२)  सुबह सुबह उठने के …

Healthtips (अमरूद)

अमरूद (पेरू) के बारे में कुछ जानकारिया भारत में आम की तरह अमरूद भी बहुत प्रसिद्ध है । अमरूद साल में दो बार आते हैं , कुछ तो साल भर फल देते हैं। जिसे हम बरोमासी भी कहते हैं । भारत में अमरूद की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमे से सफेदा, लौखनऊ,४९ इल्लहबादी,सफेदा, अर्का, एप्पल कलर, मृदुला, ललित आदि इनके अलावा हम थाईलैंड के अमरूद की कुछ जिसमे भारत में उगाते हैं। अमरूद का फल ज्यादा तर एक ही हरे रंग के होते हैं । अमरूद के अंदर का भाग दो रंगो में पाया जाता है । एक जो भुरा और दूसरा गुलाबी रंग का होता है , उपर से तो ये  हरे रंग के है ही होते हैं । पकने के बाद इनका रंग पीले , हल्का पीला रंग का हो जाता है  ये फल अधिकतर १०० ग्राम से लेकर २०० ग्राम तक के पाए जाते हैं जिनमें किस्म के हिसाब से इनके अंदर बीज होता है  १०० ग्राम समान अमरूद के फल में २० से २५ ग्राम बीज पाया जाता है । आज के समय में तो हाई ब्रीड के अमरूद २ से ३ किलो के  हो रहे हैं और उनमें ५० से १०० ग्राम ही बीज होते हैं। अमरूद भारत के अधिकतर भागो में आसानी से मिल जाता है।  भारत में अमरूद को अलग अलग प्रांतों में कई नामों से पुकारा जाता है महाराष्ट्र में…

Diprestion (तनाव)

क्या है diprestion????

Diprestion एक तरह की मनुष्य का मानसिक रोग है  ये कोई नई बीमारी नहीं है ये सदियों से चली आ रही है  आज से सैकड़ों साल पहले भी मनुष्य किसी बात , अनहोनी  या किसी अपनो के मृत्यु के कारण डिप्रेशन में चला जाता था  और अपने प्राण तक त्याग देता था । या फिर वो पागलों जैसा  बर्ताव करने लगता था । फर्क इतना है कि पहले जमाने में हजारों में एक दो ऐसे  रोगी मिलते थे पर आज के समय में सौ के चालीस लोग आपको मानसिक तनाव के रोगी मिलेंगे । आज जो हम थोड़ी , थोड़ी बातों में गुस्सा कर अपना माथा  खराब कर लेते हैं । घर में बात, बात पर अपनी से लड़ाई झगड़ा करना , अपने  आमदनी को लेकर भविष्य कि चिंता करना ऐसी कई  वाजाहयें है जिसको हम diprestion कहते हैं, जो एक ऐसी बीमारी है जिसका शिकार होने पर आदमी कब मौत को गले लगा ले , या फिर पागल हो जाए कोई नहीं जानता । इस लिए सारी बीमारियो से खतरनाक मनुष्य का मानसिक रोगी होना है ।
क्यों होता है diprestion????Diprestion दो तरह के होते हैं  (१)      जो जन्म से ही मानसिक रोग से ग्रस्त होता है , जो गर्भ में ही शरीर के कुछ नशों का विकसित ना होने के कारण होता है । जिसको हम मंद बु…

Ayurveda life

Ayurveda life styleAyurveda

Ayurved ke bare me kuch जानकारियां।।।।।।प्राचीन भारत में आयुर्वेद  पद्धति द्वारा बड़ी से बड़ी बीमारियों का इलाज किया जाता था । आज हम अगर एलोपैथिक दवाओं के आगे उस पद्धति को  भूलते जा रहे हैं तो ये हमारी सबसे बड़ी भूल है । क्यों कि उस एक भूल के कारण हम प्राकृतिक वनस्पतियों  को धीरे धीरे नाश करते जा रहे हैं। क्यों की अयुर पद्धति में जितनी भी बीमारियों का इलाज  होता है ओ प्रकृति वनस्पतियों , जड़ी बूटियों से बनाई हुई  दवाओं से ही होता है । आयुर्वेद के दवाओं के सेवन में रोगी को  अपने दैनिक जीवन। में कुछ चीजों को परहेज करने की जरूरत होती है तथा  बीमारी के हिसाब से समय थोड़ा ज्यादा लगता है । पर  आयुर्वेदिक उपचार से रोगी का रोग जड़ से समाप्त भी हो  जाता है । हमारे देश में वैदिक काल से ही इस पद्धति का उपयोग  होते आ रहा है धनवंतरी को आयुर्वेद का जन्म दाता कहा जाता है , चरक संहिता, में हर एक बीमारियों और उनके इलाज। के बारे में बताया गया है जो आज भी कुछ संतो , आचार्यों , और आयुर्वेद डाक्टरों ने इस पद्धति को जीवंत रखा है । आज विश्व के कोने कोने में आयुर्वेद का प्रयोग होने लगा है  आज। के…