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धर्म (६) भारत वर्ष में उत्पत्ति होने वाले संप्रदाय

संप्रदाय का उदय ( भारत ) भारत को विश्व गुरु का दर्जा इस लिए दिया जाता है  क्यों कि यहां पर अनेक महापुरुष का जन्म हुआ  जो अपने ज्ञान को विश्व के कोने कोने में फैलाया  Justऔर दुनियां के हर कोने में अपना ज्ञान संप्रदाय का पताका लहराया जिसका प्रमाण आज भी देखने को मिलता है और इस सब प्रमाणों से ये ज्ञात होता है कि  ये सारे संप्रदाय उस सनातन संस्कृति से ही निकले हुए  अंश हैं जो अलग अलग भाषाओं में भले हों पर ये भारत  भूमि से ही जन्मे हैं। यही कारण है कि जितने भी ऋषि मुनि हुए उनको एक  देवता की उपाधि प्राप्त है जो ईश्वर का एक अंश भी माना जाता है हमारे भारतीय ग्रंथो में ईसा मसीह को कृष्ण मोहम्मद को शिव का अंश माना जाता है। इसलिए हम कहते हैं  सम्पूर्ण विश्व सनातनी है बस ओ संप्रदायों में विभाजित होकर अपने अपने कर्मो का पालन कर रहे हैं। यही कारण है कि हम जिस जाति संप्रदाय में पैदा होते हैं हमारा धर्म होता है कि हम अपने कर्मो का पालन।  उसी जाति संप्रदाय में रहकर जीवन निर्वाह करें। मनुष्य का कर्म (धर्म) जैसे जैसे हम मनुष्य जाति हम अनेक काल खंडो से हम 

धर्म (५) सनातन धर्म की संस्कृति

  क्या है सनातन धर्म का अर्थ?? सनातन शब्द का अर्थ इतिहास में अलग अलग मिलते हैं कुछ विद्वानों की मान्यता है कि सनातन शब्द का अर्थ  निराकार रूप है जिसका ना आदि है ना अन्त जिसमें पूरा  ब्रह्माण्ड इसमें समाहित है। ] सनातन धर्म मूलत: भारतीय धर्म है, जो किसी ज़माने में पूरे वृहत्तर भारत (भारतीय उपमहाद्वीप) तक व्याप्त रहा है। विभिन्न कारणों से हुए भारी धर्मान्तरण के बाद भी विश्व के इस क्षेत्र की बहुसंख्यक आबादी इसी धर्म में आस्था रखती है। सिन्धु नदी के पार के वासियो को ईरानवासी हिन्दू कहते, जो 'स' का उच्चारण 'ह' करते थे। उनकी देखा-देखी अरब हमलावर भी तत्कालीन भारतवासियों को हिन्दू और उनके धर्म को हिन्दू धर्म कहने लगे। भारत के अपने साहित्य में हिन्दू शब्द कोई १००० वर्ष पूर्व ही मिलता है, उसके पहले नहीं। हिन्दुत्व सनातन धर्म के रूप में सभी धर्मों का मूलाधार है क्योंकि सभी धर्म-सिद्धान्तों के सार्वभौम आध्यात्मिक सत्य के विभिन्न पहलुओं का इसमें पहले से ही समावेश कर लिया गया था।  पर अगर हम अपने मत से देखें तो हमें इसका एक अर्थ  हमारे कर्मो से भी जुड़ा हुआ है जि

धर्म ( ४ )

आज १४ अप्रैल दिन मंगलवार आप सभी  को हमारे तरफ से सादर प्रणाम स्वीकार हो ईश्वर आप सभी को हमेशा खुश सुख शांति न प्रदान करें आप सभी से में माफी चाहूंगा कल मै लेख  नहीं लिख पाया कुछ उलझने थी इस लिए आज  जरूर पूरा करूंगा  कर्म क्या है ???? इसका धर्म से क्या ताल्लुक है,????? इंसान , समस्त संसार में वो जाति जो ईश्वर  से लेकर दुनियां की हर वस्तु पर प्रभुत्व  रखना चाहती है और प्रभुत्व को इस्थापित करने के लिए हर युग में कभी ज्ञान तो कभी विज्ञान एक इतिहास  बनाने की कोशिश की जिसे हम आज ग्रंथो, उपनिसदो में तथा लोक कथाओं के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं जिससे ये मालूम होता है कि भूत काल सतयुग , द्वापर , त्रेता, और कलयुग  में हमारा क्या किरदार है इस संसार को चलाने में। अगर सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं तो कुछ अंश हमें  अपने शिक्षा ग्रहण करने के समय में मिल जाता है  अगर हम धर्म को जानना चाहते हैं तो हमें कही और जाने की जरूरत नहीं हम जिस परिवार में जन्म लिए हैं उसी से जान सकतें हैं। जैसे कि हम एक किसान के घर जन्म लिया  तो मेरे पिता ने मेरा नाम  रखा और न

धर्म (३ ).....

धर्म  के इस तीसरे भाग में आप सभी का स्वागत है हमारी तरफ से ईश्वर से प्रार्थना है कि इस संकट की घड़ी में आप सभी निरोग खुश रहें  अगर हम आज कुछ समय अपने आप को ये समझ रहें हैं कि हम इस लॉक डाउन में परेशान हैं तो आप सही सोच रहे हैं लेकिन अगर आप अलग नजरिए से इस संसार को देखते हैं तो आप को अपना कष्ट नजर ही नहीं आएगा क्यों कि सोचने समझने की क्षमता ईश्वर ने सिर्फ हम इंसानों को ही दिया है अगर सर्वे भवन्तु: की नजरों से देखते हैं तो प्रकृति आज अपने आप को सवार रही है  वो भी हमारे लिए क्यों कि आज तक हमने  उसका बहुत दोहन किया आज जब हम कोरोना की वजह से अपने सारे कामों को विराम दिया है तो ये कायनात  अपने को हमें आगे और कुछ देने के लिए सवर रहीं हैं  आज हम क्यों इतने परेशानि यो से घिरे हैं इसका एक मात्र कारण हमारा धर्म है । जिसको हमने ताक पर रखकर कर आगे जाने की कोशिश  की पर सिकंदर बनकर भी आज मुंह की खा गए  और आज कोई बादशाहीयत हमारे काम नहीं आ रही है आज कोई भी धरम  जिसको हमने खुद बनकर उसकी टोपी पहन कर अपने आप को अनोखा बताने की कोशिश कर रहे हैं वो आज कुछ काम नहीं आ रही है जानते हैं क्यों 

धर्म (१)

आज 9/04/2020 गुरुवार का दिन भारत में कोरॉना महामारी के लोक डाउन के 22 ई सवा दिन है इतिहास गवाह है कि जब भी हमारे देश पर या समुल विश्व कोई संकट आया है तो उसके समाधान के लिए भारतवर्स हमेशा आगे आया है और आज भी इस महामारी को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है ए भारत भूमि पर आज के समय जो हमारी विडम्बना है वो भूत काल में कम देखने को मिली है। पर आज भी हम हजारों भाषाओं अलग अलग रहन सहन होते हुए भी इस संकट में एक नजर आ रहे हैं जानतें हैं इनस भी का कारण क्या हैं वो हैं हमारा धर्म ,..... क्यों कि पूरे विश्व में हमारी सनातन धर्म ही समस्त मानव जाति ए वेम् जीव जन्तु , पशु पक्षी पेड़, को ही अपना देवता मानता है इस लिए इस धर्म में  चौरसी लाख देवी देवता हैं  ए सत्य हैं इसको को तोड़मरोड़ के पेस करते हैैं उन्हें इस धर्म के बारे में पता नहीं है या तो दूसरे अनुआयिओ को देख कर ए समझते हैं कि उनका एक है तो हमारा इतना क्यों  तो उन जानकारों को हम बता दें कि ए बात सत्य है कि परमात्मा एक ही है पर उस परमात्मा में तीन अंश और उसी तीन अंशो से इस संसार में जन्म मृत्यु लय प्रलय का संचार होता है जिससे इ

धर्म( २ )

धर्म दोस्तों  आप सभी को हमारी तरफ से सादर प्रणाम सलाम है आप हमारे इस धर्म ज्ञान को पढ़ा समझा उसके लिए कोटि कोटि नमन. अगर इन लेखों में कोई त्रुटि हो भावना ,धर्म  आदि  के कारण आप सभी को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए हम क्षमा चाहता हूं। क्यों कि  लेख मै अपने चालीस साल के तजुर्बे से लिख रहा हूं । ना कि किताबी ज्ञान के कारण इस लिए मैं फिर से आप सभी से क्षमा मांगता हूं। इस लेख में मै आप को बताऊंगा कि हमें धर्म क्या  क्या दिया है और हमारा भारत क्यों श्रेट है। आप सभी को मालूम हो कि हिन्दू कोई धर्म नहीं है बस इसे हमें दूसरों को प्रभावित करने के लिए एक सोच  है जिसे महान लोगों ने किताबों में लिख कर हमारे दिमाग  में डाल दिया है और धर्म नाम को अलग तरीके से परिभाषित  कर दिया है । धर्म क्या है ...... धर्म मानव जाति एक कर्म प्रधान जीवन है जिसे हम मानव धर्म कहते हैं और ए मानव धर्म हमारे कर्म नामक शब्द से प्रकाशित होता है और ए कर्म हमें जिस योनि में मिलते हैं उन्हें इसका अनुपालन करना होता है और उसी अनुपालन को हम धर्म कहतें हैं। संसार में एक जानवर से लेकर पेड़ जल आका

****बाज.****

#बाज़ एक ऐसा पक्षी जिसे हम ईगल भी कहते है दोस्तो। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है. उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough And Tight Training किसी भी ओर की नही होती। मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 Kmt. ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर आधुनिक जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है। यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है? तेरी दुनिया क्या है? तेरी ऊंचाई क्या है? तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है। धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 Kmt. उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है। 7 Kmt. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते है। लगभग 9 Kmt. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है। अब धरती से वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं